Chandrayaan2 पूर्ण रूप से सफल होगा मिशन, लैंडर विक्रम पर सच हो चुकी है इनकी भविष्यवाणी!

बेगलुरू। भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान2 मिशन की आंशिक सफलता को उस वक्त परवान चढ़ गए इसरो चीफ के. सिवन ने शनिवार, 7 सितंबर रात को प्रेस कांफ्रेस में कहा कि लैंडर विक्रम के लोकेशन का पता चल गया। इसरो चीफ ने बताया कि आर्बिटर ने लैंडर विक्रम की थर्मल तस्वीर भेजी है। इसके बाद से ही पूरे देश में चंद्रयान 2 मिशन के सफल होने को लेकर उम्मीदें बढ़ गईं हैं। आपको जानकर यकीन नहीं होगा, लेकिन जब मिशन चंद्रयान2 के फेल होने की निराशा में पूरा देश दुखी थी उसी समय ही ज्योतिषविद् पंडित शील भूषण शर्मा ने ज्योतिषीय गणित से चंद्रयान2 मिशन के सफल होने की घोषणा कर दी थी।

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जी हां, यह सच हैं। पंडित शील भूषण शर्मा की भविष्यवाणी के मुताबिक जिस समय ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम संपर्क का टूटा उसी समय भारत के पूर्वी क्षितिज पर मिथुन राशि अस्त हो रही थी और कर्क का उदय हो रहा था। उनके मुताबिक मध्यलोचन नक्षत्र ज्येष्ठा पर लग्नेश चंद्रमा का संचार, नीच राशि चंद्र पर राशीश मंगल की दृष्टि और चंद्र गुरू युति, यात्रा शुरू होने के ज्योतिषीय योगों का विश्लेषण यात्री की पूर्ण सफलता की सूचना देता है।

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ज्योतिषविद् शर्मा ज्योतिषीय गणित के मुताबिक चंद्रयान2 अपने मिशन में पूर्ण सफलता प्राप्त करेगी। उनके गणित के मुताबिक आर्बिटर से लैंडर विक्रम का संबंध जुड़ेगा और यह संबंध संपर्क अल्पकालिक होने की संभावना है और अगर आपने रविवार को इसरो चीफ के. सिवन के बयान पर ध्यान दिया हो तो उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा की थी कि चंद्रयान2 का लैंडर विक्रम मिल गया है, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। के.सिवन में घोषणा के दौरान यह भी बताया कि आर्बिटर ने लैंडर की थर्मल तस्वीर भी क्लिक की है, जो पं. शील भूषण शर्मा द्वारा की गई भविष्यवाणी को सही ठहरा रही है।

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गौरतलब है पंडित शील भूषण शर्मा ने यह भविष्यवाणी गत 6 सितंबर, 2019 को थी। अपनी भविष्यवाणी में उन्होंने इसका भी उल्लेख किया था कि लैंडर विक्रम का आर्बिटर से संबध जुड़ेगा और रविवार को इसकी पुष्टि भी हो गई जब इसरो चीफ ने इसकी घोषणा कर दी। दरअसल, शनिवार 7 सितंबर को लैंडर विक्रम को चांद के साउथ पोल पर लैंड करना था, लेकिन चांद के 2.1 किलोमीटर पहले उसका संपर्क ग्राउंड स्टेशन से टूट गया था, जिसके बाद से मिशन चंद्रयान2 को भविष्य को लेकर पूरे देश में निराशा घर कर गई थी।

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ज्योतिषविद् की अब तक की सच हुईं भविष्यवाणी से उम्मीदों के पंख लग गए हैं, क्योंकि उनकी भविष्यवाणी के मुताबिक चंद्रयान2 एक सक्सेसफुल होगा। इसरो चीफ के. सिवन ने लैंडर विक्रम के लोकेशन मिलने के बाद से मिशन चंद्रयान2 की कायमाबी को लेकर आशावादी हो गए हैं। उन्होंने बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि लैंडर विक्रम के चांद की सतह से टकराने और क्षतिग्रस्त होने के अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं।

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ऐसा माना जा रहा है कि लैंडर विक्रम सुरक्षित है और जल्द ही ग्राउंड स्टेशन लैंडर विक्रम से संपर्क साधने में सफल हो सकता है, क्योंकि चांद की सतह पर मौजूद लैंडर विक्रम अभी पावर जनरेशन और सोलर पैनल्स की मदद से बैटी का रिचार्ज कर सकता है। 1.471 किलोग्राम वजनी लैंडर विक्रम चांद के साउथ पोल को एक्सप्लोर करने वाला पहला मून मिशन हैं। लैंडर विक्रम के अलावा छह पहियों वाला रोवर प्रज्ञान भी इस मिशन का हिस्सा है। लैंडर विक्रम को साउथ पोल पर जहां तीन प्रयोग करने हैं तो रोवर प्रज्ञान को दो प्रयोगों को पूरा करेगा।

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इसरो के मुताबिक चंद्रयान2 मिशन की सफलता रोशनी वाले लूनर डे ( पृथ्वी के 14 दिन के बराबर) में संभावित हैं और अगले 12 दिन में ग्राउंड स्टेशन लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश करेगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिक की मानें तो चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर में वह टेक्नोलॉजी है कि वह गिरने के बाद भी खुद को खड़ा कर सकता है, लेकिन उसके लिए जरूरी है कि उसके कम्युनिकेशन सिस्टम से संपर्क हो जाए और उसे कमांड रिसीव हो सके।

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उल्लेखनीय है चांद की सतह पर विक्रम लैंडर के गिरने से इसरो निराश इसलिए नहीं है। चूंकि विक्रम लैंडर अपने तय स्थान से करीब 500 मीटर दूर चांद की जमीन पर गिरा पड़ा है, लेकिन जैसे ही लैंडर विक्रम का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क स्थापित गया तो वह ग्राउंड कमांड से अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सकता है। इसरो वैज्ञानिक अभी यह प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह विक्रम लैंडर को वापस उसके पैरों पर खड़ा होने का कमांड दिया जा सके और अगर पंडित शील भूषण की भविष्यवाणी की ओर लौटें तो उन्होंने स्पष्ट कहा है कि आर्बिटर से लैंडर विक्रम से अल्पकालिक संपर्क होगा।

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जानकारी के मुताबिक विक्रम लैंडर में एक ऑनबोर्ड कम्प्यूटर है, जो खुद को दोबारा खड़ा करने में सक्षम है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब उसका ग्राउंड स्टेशन से किसी तरह से संपर्क स्थापित हो जाए, जिसके जरिए लैंडर विक्रम के कम्युनिकेशन सिस्टम को कमांड भेजा जाता है। दरअसल, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए लैंडर विक्रम के नीचे पांच थ्रस्टर्स लगे है और उसके चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगाए गए हैं, जो अंतरिक्ष में यात्रा के दौरान उसकी दिशा तय करने के लिए ऑन किए जाते थे, जो अब भी सुरक्षित हैं।

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बताया जता है कि लैंडर विक्रम के एक हिस्से में उससे कम्युनिकेशन एंटीना दब गया है और उसी हिस्से में भी थ्रस्टर्स हैं और अगर ग्राउंड स्टेशन के कमांड को सीधे या ऑर्बिटर के जरिए दबे हुए एंटीने ने रिसीव कर लिया तो उसके थ्रस्टर्स को ऑन किया जा सकता है और लैंडर विक्रम एक तरफ से वापस उठकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो इस मिशन से जुड़े वे सारे प्रयोग हो पाएंगे जो पहले से इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 को लेकर तय किए थे और चंद्रयान2 के पूर्ण सफल माना जाएगा।

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