Chandrayaan-3: आखिर क्या है ऑर्बिटर, विक्रम, प्रज्ञान और कैसे करेंगे ये चांद पर काम
Chandrayaan-3: इसरो की ओर से चंद्रमा मिशन की शुरुआत की गई है जिसे चंद्रयान-3 का नाम दिया गया है। यह मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा है। ऑर्बिटर या प्रपल्शन मॉड्यूल, विक्रम और प्रज्ञान।
क्यों है विक्रम और प्रज्ञान नाम?
विक्रम का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है, यह चांद पर लैंड करने के लिए तैयार किया गया लैंडर है। जबकि प्रज्ञान को संस्कृत भाषा से लिया गया है, यह रोवर है जिसे विक्रम चांद पर लेकर जाएगा।

कैसे ऑर्बिटर, विक्रम, प्रज्ञान पहुंचा चांद पर
ऑर्बिटर, विक्रम और प्रज्ञान को चांद पर पीएसएलवी एलवीएम 3 रॉकेट लेकर गया है। चांद पर पहुंचने के बाद विक्रम ऑर्बिटर से अलग होकर चांद पर लैंड करेगा।
कैसे करेंगे तीनों काम
ऑर्बिटर चांद की सतह पर रहेगा और विक्रम के साथ संवाद स्थापित करने का काम करेगा, जोकि सैटेलाइट के माध्यम से धरती से कनेक्ट रहेगा। चांद की सतह पर लैंड करने के बाद विक्रम प्रज्ञान को चांद की सतह पर छोड़ देगा। इसके बाद प्रज्ञान चांद की सतह पर अपनी खोज को पूरा करेगा।
क्या है रोवर का साइज
प्रज्ञान रोवर की बात करें तो इसका आकार 91.7 x 75.0 x 39.7 सेंटीमीटर है जोकि 6 पहियों वाले ड्राइव व्हील पर जुड़ा है। इसमे नेविगेशन कैमरा लगे हैं, साथ ही इसपर सोलर पैनल लगे हैं जोकि 50 वाट तक की ऊर्जा तैयार करते हैं। जोकि सीधे विक्रम के साथ संवाद करने में मदद करेगा।
विक्रम के 6 अहम उपकरण
प्रज्ञान से मिली जानकारी को विक्रम सीधे ऑर्बिटर को देगा और ऑर्बिटरर सिग्नल को धरती पर भेजेगा। विक्रम लैंडर प्रज्ञान को रिलीज करने के बाद अपने वैज्ञानिक परीक्षण भी करेगा। विक्रम की बात करें तो इसमे 6 मुख्य उपकरण लगे हैं।
1. ChaSTE यानि चंद्र सर्फेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट जोकि सतह के तापमान आदि की जांच करेगा।
2. ILSA यानि इंस्ट्रूमेंट फॉर लूनर सिस्मिक एक्टिविटी जोकि चांद केी सतक के भीतर की जानकारी और भूकंप से संबंधित जानकारी को इकट्ठा करेगा।
3. RAMBHA यानि रेडियो एनॉटोमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फेयर एंड एटमोस्फेयर जोकि चांद पर मौजूद गैस की जानकारी को इकट्ठा करेगा।
4. APXS यानि अल्फा प्रैक्टिकल एक्स रे स्पेक्ट्रोमीटर जोकि सतह पर मौजूद तत्वों की जांच करेगा।
5. LIBS यानि लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेकट्रोस्कोप
6. रेट्रोफ्लेक्टर ऐरे को नासा ने मुहैया कराया है जोकि चांद की रेंज का अध्ययन करेगा।
इसके अलावा ऑर्बिटर में एक स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लैनेट अर्थ यानि शेप भी मौजूद है जोकि चांद से धरती का अध्ययन करने में मदद करेगा। विक्रम और प्रज्ञान की बात करें तो इसे 14 दिन तक के लिए काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। बता दें कि चांद पर 14 दिन धरती पर एक दिन के बराबर होते है।












Click it and Unblock the Notifications