चेन्नई का वो टेकी जिसने सिर्फ लैपटॉप से ढूंढ लिया था चंद्रयान-2 का मलबा
Chandrayaan 3: चांद की सतह पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए इसरो पूरी तरह से तैयार है। इससे पहले 2019 में चंद्रयान-2 सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने में विफल रहा था। उस वक्त चेन्नेई के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर शानमुंगा सुब्रमण्यम 2019 में सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने विक्रम लैंडर के मलबे की लोकेशन को ढूंढा था। वह इस बार भी चंद्रयान 3 पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।
दिसंबर 2019 में सुब्रमण्यम ने चंद्रयान 2 के लैंडर के मलबे की तलाश की थी जोकि नासा और इसरो की पहुंच से भी बाहर था। सुब्रमण्यम के पास सिर्फ एक साधारण सा लैपटॉप है, उन्होंने नवंबर 2019 में कई दिन इसकी तलाश में खर्च किए थे।

उन्होंने पुरानी और नई तस्वीरों का विश्लेषण किया। चांद की सतह की तस्वीरों को जूम करके उन्होंने पिक्सल-पिक्सल को मिलाया। जिसकी मदद से उन्होंने दोने तस्वीरों के बीच के अंतर को ढूंढा और विक्रम लैंडर के हिस्से की जानकारी दी।
सुब्रमण्यम की खोज की नासा ने भी पुष्टि की थी। सुब्रमण्यम चेन्नई की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते थे, वह पिछले कुछ दिनों से चंद्रयान 3 की लैंडिंग में काफी व्यस्त हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं लॉन्च से पहले बहुत उत्साहित हूं।
मैं इस लैंडिंग को देखने के लिए कल छुट्टी लूंगा। मैंने लैंडिंग साइट डिजिटल एलीवेशन मॉडल्स को तैयार किया है। जहां पर लैंडिंग होनी है वहां की तस्वीर को मैंने पहले ही पब्लिश किया है, यह तस्वीर पहले से ही मौजूद है।
लैंडिंग की प्रस्तावित साइट को सुब्रमण्यम ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि मैं अलग-अलग टेरेन की ऊंचाई को मापता हूं, उदाहरण के तौर पर प्रस्तावित क्षेत्र की हर जानकारी का विश्लेषण करता हूं, इसके लिए इमेजर्स एंड स्पेक्टोमीटर, पीडीएस4 का इस्तेमाल करता हूं। इसके अलावा नासा और और इसरो की तस्वीर का भी इस्तेमाल विश्लेषण के लिए करता हूं।
सुब्रमण्यम मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हैं। लेकिन उन्होंने अपना करियर आईटी सेक्टर में बनाया है। पिछले 15 साल से वह नौकरी कर रहे हैं। उनका काफी लोकप्रिय फेसबुक पेज है, जोकि मौसम की जानकारी देता है।












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