Chandrayaan-3: चांद के अंधेरे हिस्से में उतरेगा चंद्रयान-3, जानें उस साउथ पोल के बारे में ये खास बातें
Chandrayaan 3 South Pole Fact: भारत का मिशन मून 'चंद्रयान-3' जल्द ही चांद की सतह पर उतरकर इतिहास रचने से कुछ कदम की दूरी पर है। चंद्रयान-3 का लैंडर मॉड्यूल 23 अगस्त शाम 05:30 से 06:30 बजे चांद के उस हिस्से को छुएगा, जिसे अब तक किसी ने नहीं देखा। इसरो के मुताबिक लैंडिंग इवेंट का सीधा प्रसारण शाम 5:20 बजे शुरू होगा।
भारत का चंद्रयान-3 चांद पर जिस जगह पर उतरेगा, वहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में जानिए उस जगह की खास बातें, जहां उतरकर भारत इतिहास रचने वाला है।

चंद्रयान-3 को दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा
अब तक माना जा रहा था कि इसरो का चंद्रयान दक्षिणी ध्रुव यानी साउथ पोल पर उतरेगा, लेकिन इसरो प्रमुख एस सोमनाथ बता चुके हैं कि हम चंद्रयान-3 को दक्षिणी ध्रुव के पास उतार रहे हैं। ऐसे में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक स्थित मैंजनिस-यू क्रेटर के पास चंद्रयान-3 को उतार सकता है।
उबड़-खाबड़ इलाका
भारत जिस जगह उतरकर इतिहास रचने जा रहा है। वहां चांद की जमीन काफी मुश्किल और चुनौतियों के भरी है। चंद्रमा का ध्रुवीय क्षेत्र अत्यंत कठिन भूभाग है। दक्षिणी ध्रुव बड़े-बड़े गड्ढों से भरा हुआ है, कुछ तो हजारों किलोमीटर तक फैले हुए हैं।
घनघोर अंधेरा
इसके कुछ इलाके पूरी तरह से घनघोर अअंधेरे में हैं, जहां सूरज की रोशनी का एक कण भी कभी नहीं पहुंच पाया है। ज्यादा अंधेरा होने के कारण किसी भी मिशन को लैंडिंग करने में परेशानी होती है।
तापमान में -200 डिग्री
वहीं जब लूनर नाइट होती है तो यहां का तापमान -200 डिग्री तक गिर जाता है। इसी वजह से यह चांद के सबसे दुर्लभ एरिया में से एक है। साउथ पोल के पास अधिकतम तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो सकता है।

साउथ पोल के पास पानी की जांच
चंद्रयान-3 चांद की जिस स्थान पर लैंड करेगा, वहां इसरो को पानी मौजूदा वक्त में ठोस रूप (बर्फ) में मिलेगा। ऐसे में जांच की जाएगी और पता लगाया जाएगा कि वह कितने काम का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भौगोलिक रूप से यह जगह मिनरल्स की नजर से काफी अच्छी जगह है। ऐसे में काफी मिनरल्स पाए जा सकते हैं।












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