चंद्रयान-3: इसरो चीफ को कितनी मिलती है सैलरी?

भारत स्पेस सेक्टर में नया इतिहास रचने जा रहा, जहां आज शाम चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह पर लैंड करेगा। इस मिशन को काफी अहम माना जा रहा, क्योंकि इससे हमारे चांद के बारे में काफी अहम जानकारियां मिलेंगी। इस बीच इसरो चीफ एस सोमनाथ सुर्खियों में छाए हुए हैं। आइए जानते हैं कि इसरो चीफ को सरकार कितनी सैलरी और कौन-कौन सी अन्य सुविधाएं देती है।

इसरो का पूरा नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। इसका मकसद अंतरिक्ष में नई खोज करना और सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करना है। पिछले कुछ दशकों ने इसरो ने कई बड़ी कामयाबी हासिल की। अब ये दुनिया के टॉप स्पेस एजेंसियों में शामिल हो गई है।

ISRO chief

इसरो चीफ होने के नाते एस.सोमनाथ के पास काफी अहम जिम्मेदारी है। वो एजेंसी में होने वाली हर गतिविधि के लिए जिम्मेदार हैं। 7वें वेतन आयोग के मुताबिक इसरो चीफ की सैलरी ढाई लाख रुपये प्रति महीने होती है। इसके अलावा उनको आवास, वाहन आदि की सुविधा भी मिलती है।

इसरो चीफ को एक आईएएस या आईपीएस वाला ओहदा हासिल होता है। अप्रैल 2022 में केंद्र सरकार ने इसरो चीफ एस. सोमनाथ को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करवाई थी। इसके तहत वो चाहे जहां रहें, उनके साथ चौबीसों घंटे 4-6 सशस्त्र कमांडों तैनात रहेंगे।

क्या है इसरो चीफ की शैक्षणिक योग्यता?
एस. सोमनाथ ने कोल्लम के टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी. टेक किया है। इसके बाद उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया। वो गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं।

वो 1985 में वीएसएससी में शामिल हुए और शुरुआती चरणों के दौरान पीएसएलवी के एकीकरण के लिए एक टीम लीडर थे। उन्होंने लॉन्चिंग व्हीकल के विकास में काफी अहम भूमिका निभाई है। उनके इसी योगदान को देखते उन्हें 2022 में इसरो चीफ की जिम्मेदारी दी गई। उनका कार्यकाल तीन साल का है।

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