Chandrayaan 3 Kab Pahuchega: जानें कब चांद को चूमेगा भारत का चंद्रयान-3, ऐसा होगा पूरा सफर
chandrayaan 3 chand par kab pahunchenge,भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र दोपहर 2.35 बजे चंद्रयान 3 को सफलतापूर्वक लॉन्च करके नया इतिहास लिख दिया।
चंद्रयान 3 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से बाहुबली रॉकेट एलवीएम3-M4 से इसे स्पेस में भेजा गया है। लॉन्चिंग के 6 मिनट बाद चंद्रयान-3 को रॉकेट ने ऑर्बिट में प्लेस कर दिया। चंद्रयान 3 करीब 40 दिन बाद चंद्रमा पर लैंड करेगा। प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा के ऑर्बिट में रहकर धरती से आने वाले रेडिएशन्स की स्टडी करेगा।

चंद्रयान-3 के पृथ्वी के बाहरी ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित होने के बाद इसके सौर पैनर खुल गए हैं और चंद्रयान ने पृथ्वी के चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं। धीरे-धीरे चांद अपनी कक्षा को बढ़ाएगा और चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा।
चंद्रमा के 100 किमी की कक्षा में आने के बाद लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग किया जाएगा और इसके बाद लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग होगी। चंद्रमा की ओर भेजने से पहले चंद्रयान-3 को धरती के चारों तरफ कम से कम पांच चक्कर लगाने होंगे। ये हर चक्कर बड़ा होने के साथ चंद्रयान को चांद के करीब लेकर जाएगा।
इसके बाद चंद्रयान-3 ट्रांस लूनर इंसरशन (TLI) कमांड दिए जाएंगे। जुलाई तक TLI को पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चंद्रमा करीब साढ़े पांच दिनों तक चंद्रमा की ओर यात्रा करेगा। चंद्रयान चंद्रमा की बाहरी कक्षा में पांच अगस्त के आसपास पहुंचेगा।
23 अगस्त को डीबूस्ट का कमांड (गति का धीमा करने के लिए) दिया जाएगा। इसके बाद चंद्रयान-3 की चंद्रमा की सतह पर उतरने की प्रक्रिया शुरू होगी। करीब 40 दिन बाद, यानी 23 या 24 अगस्त को लैंडर और रोवर चांद के साउथ पोल पर उतरेंगे। ये दोनों 14 दिन तक चांद पर एक्सपेरिमेंट करेंगे।
अगर, भारत का चंद्रयान मिशन सफल होता है और लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में सफलता से लैंड कर जाता है, तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। अभी तक यही तीन देश हैं जो ऐसा करने में सफल रहे हैं। हालांकि लैंडिग की सफलता दर मात्री 52 फीसदी है।












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