Chandrayaan 2: लैंडर Vikram से संपर्क टूटने की वजह इस तरह पता करेगा ISRO
नई दिल्ली। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम' का चांद पर उतरते समय संपर्क टूटने के पीछे की वजहों की जांच करेगा। चंद्रयान टीम की एक टीम इस पर जानकारी जुटाएगी कि आखिर संपर्क टूटने के पीछे क्या वजहें रहीं और क्यों इसमें वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिल सकी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक चंद्रयान -2 की ऑर्बिट का इस्तेमाल कर नक्शा देखेंगे और जानेंगे कि कमी कहां रही। इसरो ग्लोबल स्पेस नोटवर्क से भी सेंसर डेटा प्राप्त करने का प्रयास करेगा ताकि इसमें बेहतर जांच की जा सके।
भारत का स्पेस मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर का 'विक्रम का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। लैंडर को रात लगभग एक बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया। 'विक्रम ने 'रफ ब्रेकिंग और 'फाइन ब्रेकिंग चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन 'सॉफ्ट लैंडिंग से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया।
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3,840 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को जीएसएलवी एमके-3 एम1 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था अंतरिक्ष यान 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था। इसरो ने दो सितंबर को ऑर्बिटर से लैंडर को अलग करने में सफलता पाई थी, लेकिन शनिवार तड़के विक्रम का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था
मिशन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों से कहा कि उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। देश आप पर गर्व करता है, सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करें, हौसला रखें। यह आपकी कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, आपने बहुत उत्तम सेवा की है, मैं आपके साथ हूं। ये क्षण हौसला रखने का है, और हम हौसला रखेंगे। हमें उम्मीद है अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में हम कठिन परिश्रम करना जारी रखेंगे।












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