पांच राज्यों में चुनाव के बाद MSP को लेकर केंद्र करेगा कमेटी के गठन का ऐलान: नरेंद्र सिंह तोमर
नई दिल्ली, 04 फरवरी। केंद्र सरकार ने जिस तरह से नए कृषि कानूनों को पास किया था उसके खिलाफ किसानों ने मोर्चा खोल दिया था। तकरीबन डेढ़ साल तक किसानों ने जिस तरह से इन तीनों ही कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया उसके बाद मजबूर होकर सरकार ने इन तीनों ही काननों को वापस ले लिया है। लेकिन अभी भी किसान फसल की न्यूनतम मूल्य यानि एमएसपी की गारंटी की मांग कर रहे हैं। किसानों की मांगों को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने आज राज्य सभा में कहा कि केंद्र सरकार पांच राज्यों में चुनाव के बाद एमएसपी को लेकर एक कमेटी के गठन का ऐलान करेगी।

गौर करने वाली बात है कि मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि गेंहूं और धान की एमएसपी पर खरीद जारी रहेगी। सरकार इसकी खरीद पर 2.37 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। सरकार के इस ऐलान के बाद किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली थी. किसानों का कहना है कि एमएसपी के लिए बजट बढ़ाए जाने से किसानों को फायदा होगा। भारतीय किसान संघ के प्रांतीय संयोजक श्यामवीर त्यागी ने कहा था कि एमएसपी को लेकर कोई सवाल नहीं था, हम इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि सरकार इसे कभी खत्म नहीं कर सकती है। एमएसपी के लिए बजट बढ़ने से इसका सबसे ज्यादा लाभ छोटे किसानों को होगा।
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गौर करने वाली बात है कि नए कृषि कानूनों में एमएसपी की गारंटी नहीं थी। किसान नेता राकेश टिकैत लागातार एमएसपी की गारंटी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पहले भी चेतावनी दी थी कि कि अगर सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देती है तो वह फिर से सड़क पर उतरेंगे और एमएसपी के लिए आंदोलन करेंगे। टिकैट ने कहा कि स्वानिथान कमेटी के अनुसार किसानों की आय को दोगुना किया जाना चाहिए।












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