Sanchar Saathi App: सरकार का U-टर्न! संचार साथी ऐप पर केंद्र सरकार ने आदेश वापस लिया, विपक्ष का क्या था आरोप?
Sanchar Saathi App: संचार साथी ऐप पर मचे विवाद और विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को स्मार्टफ़ोन में इस ऐप की अनिवार्य प्री-इंस्टालेशन से जुड़ा आदेश वापस ले लिया।
यह फैसला उन दो दिनों की उथल-पुथल के बाद आया जब विपक्षी नेताओं, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस आदेश को निजता का उल्लंघन और संभावित निगरानी बताकर कड़ी आलोचना की थी। जानिए सरकार ने क्यों लिया अपना आदेश वापस विस्तार से जानिए....

सरकार ने क्यों वापस लिया आदेश?
सरकार के मुताबिक, संचार साथी ऐप को लेकर लोगों में तेज़ी से बढ़ती रुचि देखते हुए अब इसकी अनिवार्यता की आवश्यकता नहीं है। बयान में कहा गया-पिछले 24 घंटे में छह लाख से ज़्यादा लोगों ने ऐप डाउनलोड किया और कुल डाउनलोड संख्या 1.4 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है। प्री-इंस्टालेशन का आदेश सिर्फ़ इस प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए था। अब इसे वापस लिया जाता है। सरकार ने यह भी दोहराया कि ऐप को मोबाइल से हटाया जा सकता है और यह किसी भी प्रकार की जासूसी नहीं करता।
सिंधिया का संसद में बयान-"स्नूपिंग संभव ही नहीं"
लोकसभा में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, संचार साथी ऐप से जासूसी न तो संभव है और न ही कभी होगी। यह ऐप सिर्फ़ उपभोक्ताओं को साइबर अपराध से बचाने के लिए है। नागरिक चाहें तो इसे किसी भी ऐप की तरह हटा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐप की सफलता सार्वजनिक भागीदारी पर निर्भर है, और सरकार जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर आदेश में परिवर्तन को तैयार है।
विपक्ष ने उठाया था सवाल
आदेश के जारी होने के बाद से ही विपक्षी नेताओं ने इसे निजता का हनन बताया था। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा-यह हास्यास्पद है। यह सिर्फ़ फोन की जासूसी की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश को तानाशाही में बदलने की कोशिश है।
कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम ने मीडिया से कहा कि- यह वही है जो रूस और नॉर्थ कोरिया में होता है। अब हमारी निजी तस्वीरें और वीडियो पर भी नज़र रखने की कोशिश की जा रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे "एक और बिग बॉस सर्विलांस मोमेंट" बताया।
ऐप को लेकर सबसे बड़ा डर-जासूसी का खतरा?
विवाद की सबसे बड़ी जड़ यह आशंका थी कि यह ऐप सरकारी निगरानी का नया तरीका बन सकता है, खासकर Pegasus जासूसी विवाद की याद के बीच।
हालांकि सरकार लगातार कहती रही है कि यह ऐप किसी भी तरह की ट्रैकिंग, निगरानी या निजी डेटा तक पहुंच नहीं रखता।
क्या है संचार साथी ऐप?
संचार साथी, दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा विकसित एक साइबर सुरक्षा और जागरूकता प्लेटफॉर्म है। यह मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल-दोनों रूप में उपलब्ध है। इसके ज़रिए नागरिक-
- अपनी आईडी पर कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं, यह देख सकते हैं
- फ़र्जी या संदिग्ध नंबरों की शिकायत कर सकते हैं
- खोए/चोरी हुए फोन का पता लगा सकते हैं
- साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं
- सरकार का दावा है कि यह ऐप नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने में बेहद कारगर है।












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