सुप्रीम कोर्ट में सीएए का सरकार ने किया बचाव, बोली- इसमे मौलिक अधिकारों का हनन नहीं
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून की वैद्यता का बचाव करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 129 पेज का शपथ पत्र जमा किया है। यह शपथ पत्र सीएए की संभावित न्यायिक समीक्षा के खिलाफ दायर की गई है। केंद्र सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि इस कानून के तहत किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता पर असर नहीं पड़ेगा। साथ ही सरकार की ओर से कहा गया है कि इस कानून की न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत ही कम है क्योंकि नागरिकता और आप्रवासन का मसला संप्रभू सरकार के कार्यकारी क्षेत्र का विषय है।
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बता दें कि सीएए कानून को संसद में पिछले वर्ष दिसंबर माह में पास किया गया है और लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि देशभर में इसके खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है, लोग इसे भेदभाव वाला कानून बता रहे हैं। सीएए कानून के तहत हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म के लोगों को नागरिकता दिए जाने का प्रावधान हैं। शर्त यह है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के उन्ही लोगों को यह नागरिकता दी जाएगी जिनका उनके देश में धर्म के आधार पर शोषण किया गया है। इस कानून में इन तीनों देशों के मुसलमानों को अलग रखा गया है।
बता दें कि इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि मुझे कोई भी ऐसा देश बताइए जो कहता हो कि दुनिया के हर व्यक्ति का वहां स्वागत है। जयशंकर ने कहा कि हर कोई जब नागरिकता को देखता है तो इसका एक संदर्भ और मानक होते हैं। मुझे एक भी ऐसा देश दिखाएं जो कहता हो कि विश्व के हर व्यक्ति का उसके यहां स्वागत है। ऐसा कोई नहीं कहता है।












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