पंजाब: केंद्र सरकार ने बदल दी हेल्थ सेक्टर की तस्वीर, लोगों को मिल रहीं बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं

पंजाब का नाम आते ही चारों तरफ खेत, नदी और हरियाली सामने आने लगती है। पांच नदियों वाले पंजाब की रगों में ही रवानी है। लहराते-बलखाते हरे-भरे खेतों और अन्न उपजाने की क्षमता के कारण इसे गोल्डन लैंड ऑफ एग्रीकल्चर कहा जाता है।

यहां के लोग अपने रहन-सहन और निराले अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। इस रंग-बिरंगे पंजाब की एक और पहचान है कि यहां जब भी कोई संकट आता है, तो लोग एक-दूसरे का हाथ थामे नज़र आते हैं। कोरोना काल को आखिर कौन भुला सकता है। जिसने ये अहसास करवाया कि पंजाब जैसे राज्य में स्वास्थ सेवाओं को और ज्यादा बेहतर बनाने की जरूरत है। जिसके दायरे में प्रदेश के अति पिछड़े और गरीब नागरिक भी आ सकें।

स्वास्थ्य सेवा को राष्ट्रीय प्राथमिकता समझते हुए केंद्र सरकार ने इसे एक मिशन के तौर पर लिया। कुछ ही सालों में इसमें ऐसे-ऐसे बड़े बदलाव और सुधार हुए जिसका अनुभव आज पूरा पंजाब कर रहा है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना- आयुष्मान भारत के तहत पंजाब के पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज का लाभ दिया जा रहा है। योजना के दायरे में आने वाले लोग पंजाब के चिन्हित सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटल में मुफ़्त इलाज की सुविधा ले रहे हैं। इस योजना के दायरे में कई गंभीर बीमारियों के मुफ़्त इलाज शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने इस दिशा में भी काम किया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली गरीब आबादी को सस्ती, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मिशन इंद्रधनुष के जरिए गर्भवती महिलाओं और दो साल से कम आयु के बच्चों को 8 बीमारियों से बचाने के लिए सार्थक प्रयासों की शुरुआत की गई है। जबकि पंजाब में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त दवाइयां भी मुहैया कराई जा रही हैं।

केंद्र सरकार ने इन सुविधाओं के साथ-साथ इस बात को भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां एक ही जगह पर उपलब्ध रहें। जिससे डॉक्टर्स को उनके इलाज में आसानी रहे। इसके लिए राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन योजना भी लाई गई है। इसके तहत पंजाब के नागरिकों को भी जल्दी ही डिजिटल हेल्थ ID कार्ड दिए जाएंगे। इसके साथ-साथ पंजाब-वासियों को सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना लाई गई है। जिससे आप जेनरिक दवाएं बहुत किफ़ायती दरों पर खरीद सकते हैं।

पंजाब में स्वास्थ सेवाओं के बुनियादी ढांचे में सुधार और शैक्षिक अवसरों में सुधार के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध हैं। बठिंडा में विश्वस्तरीय स्वास्थ सुविधाओं से लैस एम्स और संगरूर में स्थापित पीजीआई सेटेलाइट सेंटर इस बात के जीवंत उदाहरण हैं। बठिंडा में वर्ल्ड क्लास हेल्थ सुविधा से लैस एम्स हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है। 177 एकड़ में बने बठिंडा एम्स में 750 बेड्स हैं, जबकि 11 सुपर स्पेशलिटी डिपार्टमेंट्स भी हैं। जहां क्रिटिकल केसों का भी सफ़ल इलाज संभव हो पा रहा है। इससे लोगों को महंगे इलाज से भी बहुत राहत मिली है। यहां मरीज़ों को एक्स-रे के लिए 30 रुपये, अल्ट्रासाउंड के लिए 100 से 200 रुपये, सीटी स्कैन के 1500 से 2000 रुपये जबकि एमआरआई के लिए महज 2500 रुपये ही चुकाने पड़ते हैं।

कपूरथला और होशियारपुर में दो मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया जा रहा है। कपूरथला मेडिकल कॉलेज 325 करोड़ की लागत से बन रहा है। जबकि होशियारपुर मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी इतनी ही लागत से हो रहा है। यहां पर ओपीडी सर्विस के अलावा इमरजेंसी सर्विसेज भी उपलब्ध होंगी। जिससे आसपास के ज़िलो को भी बड़ी राहत मिलेगी। इन दो मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से प्रदेश की सेवा के लिए भावी डॉक्टर्स तैयार होंगे जो प्रदेशवासियों की स्वास्थ्य सेवा में समर्पित होंगे। इन तमाम प्रयासों के साथ केंद्र सरकार ने उस कृषि प्रधान पंजाब प्रांत के बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने का काम कर दिखाया है, जो दूसरे राज्यों को भी पोषण और पौष्टिकता परोसता है।

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