केंद्र ने वाईएसआरसीपी सरकार को मारा ताना, क्या रेड्डी ने बीजेपी की नब्ज ठीक से जाना है?
केंद्र ने वाईएसआरसीपी सरकार को मारा ताना, क्या रेड्डी ने बीजेपी की नब्ज ठीक से जाना है?
विजयवाड़ा, 22 जुलाई: राजनीति अजीबोगरीब हमबिस्तर बनाती है ये बात आंध्र प्रदेश पर बिलकुल फिट बैठती है। कुछ समय पहले ही तत्कालीन आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी टीडीपी केंद्र में भाजपा के साथ थी और केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह शेयर करने के लिए उसके साथ थी। वहीं अपने दूसरे कार्यकाल की योजना बनाते हुए टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने अपना गणित कर लिया था और सत्ता पक्ष से भी बाहर हो गए थे।

वहीं वाईएसआरसीपी की अलग-अलग मजबूरियां थीं हर कदम पर तालमेल बिठाने की कोशिश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद नायडू को भारी बहुमत से हराया। भाजपा ने तेलंगाना में टीआरएस और वाईएसआरसीपी दोनों के साथ ऐसा किया जैसे उसने कुछ समय के लिए शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल के साथ यथास्थिति बनाए रखी।
वहीं राष्ट्रपति चुनाव शायद वह पद था जिसे भाजपा ने वाईएसआरसीपी, बीजद और जद (यू) जैसी पार्टियों की मदद से बड़े आराम से अपनी उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को चुनाव जितवाया और इन राज्यों ने दोस्ती निभाई। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने बीजेपी की नब्ज ठीक से जाना है? केंद्र के अब ताना मारने की मुद्रा में आने के साथ यह सवाल अहम हो गया है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जिन्होंने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त वितरण के लिए दिए गए चावल का उपयोग नहीं करने के राज्य के औचित्य पर सवाल उठाया। वास्तव में उसी चावल ने हाल ही में टीआरएस और भाजपा के बीच एक बड़ा विवाद और वाकयुद्ध हुआ। इस वाकये के बाद अब ये समझ लिया जाए कि बीजेपी को अब उनकी 'दोस्ती' की जरूरत नहीं है? अब जब राष्ट्रपति चुनाव भी खत्म हो गया है? मोदी-शाह की जोड़ी का हमेशा एक 'प्लान-बी' होता है जो काफी उपयोगी टूल होता है और यह 'ऐतिहासिक' हो जाता है।












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