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CEC Bill:चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले बिल पर राज्यसभा में क्यों बदल सकता है समीकरण? आंकड़ों से जानिए

केंद्र सरकार ने हाल ही में दिल्ली सेवा विधेयक को संसद के दोनों सदनों से बहुत ही आसानी से पास कराया है। जबकि, इस विधेयक पर विपक्षी इंडिया गठबंधन ने मोदी सरकार के खिलाफ राज्यसभा में जबर्दस्त मोर्चाबंदी की थी। लेकिन, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले विधेयक पर समीकरण बदलने से इनकार नहीं किया जा सकता।

राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या अभी 238 है, जबकि सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के पास अपने कुल 112 सांसद (मनोनीत सदस्यों समेत) ही हैं। यानी इसे सीईसी बिल को ऊपरी सदन से पास कराने के लिए कम से कम 120 सांसदों का समर्थन चाहिए।

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बीजेडी-टीडीपी ने अभी नहीं खोले हैं पत्ते
मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) विधेयक, 2023 गुरुवार को ही राज्यसभा में पेश हुआ है। दिल्ली सेवा विधेयक के समर्थन में सरकार के पक्ष में कुल 131 वोट पड़े थे। तब वाईएसआरसीपी, बीजेडी और टीडीपी ने इसका समर्थन किया था। लेकिन, सीईसी बिल पर आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी की पार्टी ने तो समर्थन देने का ऐलान कर दिया है, लेकिन बीजू जनता दल और तेलगू देशम पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

सीईसी बिल के समर्थन में वाईएसआरसीपी
वाईएसआरसीपी के राज्यसभा सांसद विजयसाई रेड्डी ने ईटी से कहा है, 'निश्चित तौर पर हम इस विधेयक का समर्थन करने जा रहे हैं। यह बिल संविधान के निर्धारित नियमों के मुताबिक है।' लेकिन, कई मौकों पर राज्यसभा में सरकार का समर्थन कर चुकी बीजेडी के राज्यसभा सांसद अमर पटनायक के मुताबिक, 'कोई जल्दबाजी नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूरी तरह से देखने के बाद ही बिल पर फैसला लेंगे। हम उचित समय पर निर्णय लेंगे।'

बीजेडी की तरह ही चंदबाबू नायडू की टीडीपी ने भी दिल्ली सेवा विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन, अब पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद के रविंद्र कुमार का कहना है, 'यह बिल अभी तो राज्यसभा में पेश ही हुआ है और हम इसे अभी ठीक से देख नहीं पाए हैं। हमें इसे ठीक से देखना होगा और उसी के मुताबिक फैसला लिया जाएगा।'

दिल्ली सेवा विधेयक पर सरकार के पक्ष में 131 वोट पड़े थे
दिल्ली सेवा विधेयक पर राज्यसभा में वोटिंग पैटर्न को देखें तो 238 सदस्यों वाले सदन में इसके पक्ष में कुल 131 वोट आए थे। जबकि, विरोध में विपक्ष (इंडिया गठबंधन) के 102 वोट पड़े थे। विधेयक के समर्थन में सत्ताधारी एनडीए के 112, बीजेडी के 9, वाईएसआरसीपी के भी 9, टीडीपी का 1 वोट आया था। बीएसपी समेत 5 सांसद अनुपस्थित रहे थे या मतदान में हिस्सा नहीं लिया था।

बीजेडी-टीडीपी के बगैर भी सरकार के पास बहुमत
इस तरह से अगर बीजेडी और टीडीपी ने विधेयक के खिलाफ वोटिंग का फैसला किया (सरकार के हिसाब से सबसे बुरी स्थिति में) तो भी फिलहाल सरकार के पक्ष में 131-10= 121 वोट आ सकते हैं। फिर भी यह बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से अधिक हैं। लेकिन, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी के अबतक के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसी संभावना बहुक कम है।

सुप्रीम कोर्ट ने संसद से कानून बनाने को कहा था
दूसरी तरफ बीएसपी समेत वे पांच अन्य सांसदों ने जिन्होंने दिल्ली सेवा विधेयक पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था, इस बार विरोध में भी वोट डाला तो भी सरकार को चिंता नहीं होनी चाहिए। दरअसल, इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसले में सरकार से सीईसी और ईसी की नियुक्ति के लिए संसद से प्रावधान तैयार करने को कहा था।

तात्कालिक व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट से यह की गई थी कि ये नियुक्तियां राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की सलाह से करेगा। केंद्र ने जो विधेयक पेश किया है, उसमें सीजेआई की जगह देश के प्रधानमंत्री की ओर से एक केंद्रीय मंत्री को सदस्य के रूप में मनोनीत करने का प्रावधान है। इसका विपक्ष विरोध कर रहा है।

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