CCI का बड़ा कदम: UltraTech और Dalmia समेत 3 सीमेंट कंपनियों से मांगे 9 साल के वित्तीय रिकॉर्ड
CCI Big Action: भारत की निष्पक्ष व्यापार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई), ने सीमेंट उद्योग की तीन बड़ी कंपनियों-अल्ट्राटेक सीमेंट, डालमिया भारत सीमेंट और श्री दिग्विजय सीमेंट-को कथित कार्टेलाइजेशन के मामले में 9 साल के वित्तीय रिकॉर्ड जमा करने का आदेश दिया है।
यह कार्रवाई ओएनजीसी (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन) के टेंडरों में प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के आधार पर की गई है। सीसीआई ने इन कंपनियों और उनके अधिकारियों को 8 सप्ताह के भीतर विस्तृत वित्तीय दस्तावेज और आयकर रिकॉर्ड जमा करने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला?
सीसीआई ने आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट, जो हाल ही में दक्षिण भारत की इंडिया सीमेंट्स की मालिक बनी है, डालमिया भारत सीमेंट और श्री दिग्विजय सीमेंट पर प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह कार्रवाई ओएनजीसी की शिकायत के बाद शुरू हुई, जिसमें दावा किया गया था कि इन कंपनियों ने इसके टेंडरों में कार्टेलाइजेशन (मिलीभगत) के जरिए कीमतों और आपूर्ति को नियंत्रित किया।
18 नवंबर 2020 को सीसीआई ने अपने जांच इकाई के महानिदेशक (डीजी) को इस मामले की जांच का आदेश दिया था। डीजी ने 18 फरवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें पाया गया कि अल्ट्राटेक की सहायक कंपनी इंडिया सीमेंट्स, डालमिया भारत सीमेंट और श्री दिग्विजय सीमेंट ने एक बिचौलिए, उमाकांत अग्रवाल, के साथ मिलकर प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया।
सीसीआई का आदेश क्या?
26 मई 2025 को सीसीआई ने डीजी की जांच रिपोर्ट पर विचार करते हुए चार पन्नों का आदेश जारी किया। इसमें निर्देश दिए गए: -
- अल्ट्राटेक सीमेंट: अपनी सहायक कंपनी इंडिया सीमेंट्स के लिए वित्त वर्ष 2015 से 2019 तक (5 साल) के ऑडिटेड वित्तीय विवरण, जिसमें बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता शामिल हो, जमा करें।
- डालमिया भारत और श्री दिग्विजय सीमेंट: वित्त वर्ष 2011 से 2019 तक (9 साल) के वित्तीय रिकॉर्ड जमा करें।
- कंपनी अधिकारियों के लिए: पांच साल के विस्तृत वित्तीय और आयकर रिकॉर्ड के साथ जांच रिपोर्ट पर औपचारिक जवाब देना होगा।
- बिक्री आय का विवरण: ओएनजीसी के टेंडरों में कथित उल्लंघनों से प्राप्त आय का ब्योरा देना होगा।
सीसीआई ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां समय सीमा (8 सप्ताह) के भीतर पूर्ण और सटीक जानकारी जमा नहीं करतीं या गलत जानकारी देती हैं, तो वे प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 45 के तहत दंड के लिए उत्तरदायी होंगी। इस धारा के तहत जुर्माना कंपनी की वार्षिक आय का 10% या प्रत्येक कार्टेल वर्ष के लिए लाभ का तीन गुना (जो भी अधिक हो) हो सकता है।
ओएनजीसी की शिकायत क्या?
2013 से 2018 तक ओएनजीसी ने ऑयल वेल सीमेंट (OWC) की खरीद के लिए टेंडर जारी किए थे। शिकायत के अनुसार, अल्ट्राटेक (इंडिया सीमेंट्स के जरिए), डालमिया भारत और श्री दिग्विजय सीमेंट ने मिलकर एकसमान या थोड़े अंतर वाले रेट्स कोट किए और बाजार को आपस में बांट लिया। यह प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन है, जो कार्टेलाइजेशन और बिड रिगिंग जैसे प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों को प्रतिबंधित करता है।
क्या है कंपनियों का जवाब?
अल्ट्राटेक सीमेंट और डालमिया भारत सीमेंट को भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला। श्री दिग्विजय सीमेंट ने भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि डालमिया भारत और इंडिया सीमेंट्स पर 10% वार्षिक आय का जुर्माना लगाया गया है, लेकिन सीसीआई ने अभी तक जुर्माने की पुष्टि नहीं की है। कंपनियां इस आदेश के खिलाफ अपील करने की संभावना तलाश रही हैं।
पहले भी सीमेंट उद्योग पर कार्टेलाइजेशन के आरोप
यह पहली बार नहीं है जब सीमेंट उद्योग पर कार्टेलाइजेशन का आरोप लगा है।
- 2012 में: सीसीआई ने बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की शिकायत पर 11 सीमेंट कंपनियों पर 6,300 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इनमें अल्ट्राटेक, इंडिया सीमेंट्स और डालमिया शामिल थीं। यह जुर्माना सीमेंट की कीमतें तय करने और आपूर्ति सीमित करने के लिए लगाया गया था।
- 2018 में: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने इस जुर्माने को बरकरार रखा, लेकिन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां मामला लंबित है।
- 2020 में: सीसीआई ने सीमेंट निर्माताओं के दफ्तरों पर छापेमारी की थी, जिसमें अल्ट्राटेक, डालमिया और अन्य कंपनियां शामिल थीं।
क्या हो सकता है आगे?
- जुर्माना और सजा: अगर, जांच में कार्टेलाइजेशन साबित होता है, तो कंपनियों पर भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, सीसीआई कंपनियों को ऐसी गतिविधियां बंद करने और उनके निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे सकता है।
- अपील: अल्ट्राटेक, डालमिया और श्री दिग्विजय पहले भी सीसीआई के आदेशों को कोर्ट में चुनौती दे चुके हैं। इस मामले में भी अपील की संभावना है।
- बाजार पर असर: सीमेंट उद्योग पहले से ही कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति की कमी के लिए आलोचना झेल रहा है। यह कार्रवाई उद्योग की विश्वसनीयता और शेयर बाजार पर असर डाल सकती है।
सीसीआई का यह कदम सीमेंट उद्योग में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अल्ट्राटेक, डालमिया और श्री दिग्विजय सीमेंट के लिए यह मामला न केवल आर्थिक, बल्कि प्रतिष्ठा के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण है। जांच के नतीजे और कंपनियों का जवाब इस मामले की दिशा तय करेंगे।
(इनपुट-PTI)












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