वो मामला, जब CBI ने लालू की गिरफ्तारी के लिए मांगी थी सेना की मदद
नई दिल्ली। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और पश्चिम बंगाल की सरकार के बीच टकराव से देश की सियासत गरमाई हुई है। जिस तरह से कोलकाता पुलिस ने सीबीआई अफसरों को हिरासत में लिया और पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने नहीं दिया गया , उसको लेकर केंद्र और ममता सरकार आमने-सामने है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सीबीआई की जांच प्रकिया पर सवाल उठाए और मोदी सरकार पर जांच एजेंसी के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गई हैं। ये पहला मौका नहीं है जब किसी केस में सीबीआई को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा हो। इसके पहले सीबीआई का बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के साथ जबरदस्त टकराव हुआ था। ये वाकया उस वक्त का है जब सीबीआई की टीम चारा घोटाले की जांच कर रही थी और उस वक्त जो कुछ भी हुआ, वो बहुत हैरान करने वाला था।

जब लालू को गिरफ्तार करने में छूटे थे सीबीआई के पसीने
साल 1997 की बात है जब सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक यूएन विस्वास चारा घोटाले की जांच कर रहे थे। उस वक्त वे राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले मामले में गिरफ्तार करना चाहते थे। तब बिहार की मुख्यमंत्री थीं, लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी। लालू यादव का सीबीआई के साथ उस वक्त सीधा टकराव हुआ था। लालू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट को लेकर संयुक्त निदेशक को कोई मदद नहीं मिली। सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं लेकिन राज्य सरकार इस गिरफ्तारी में अड़चन बनी हुई थी।

सीबीआई एसपी ने सेना से मांगी थी मदद
तब उन्होंने पटना के सीबीआई एसपी से लालू यादव की गिरफ्तारी के लिए सेना की मदद लेने को कहा। बिहार सरकार के रवैये को देखते हुए सीबीआई ने चीफ सेक्रेटरी बीपी वर्मा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वहां भी नाकामी मिली और बताया गया कि वे मौजूद नहीं हैं। सीबीआई ने आखिरकार बिहार के डीजीपी से संपर्क किया तब उन्होंने कहा कि लालू यादव की गिरफ्तारी के लिए कुछ और वक्त दिया जाए। उस वक्त संयुक्त निदेशक यूएन विस्वास ने सीबीआई के एसपी के कहा कि लालू यादव की गिरफ्तारी में वे सेना की मदद लें।

तत्कालीन गृहमंत्री ने सदन में दी थी जानकारी
सदन में मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक, उस वक्त के गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता ने बताया कि दानापुर कैंट इंचार्ज को सीबीआई एसपी ने पत्र लिखा था, 'पटना हाईकोर्ट के मौखिक आदेश के अनुसार, ये अनुरोध है कि कम से कम एक कंपनी सशस्त्र टुकड़ी सीबीआई की टीम की मदद के लिए तत्काल भेजें। सीबीआई की टीम लालू यादव को गैर जमानती वारंट के तहत गिरफ्तार करना चाहती है।'

सेना के इनकार के बाद कोर्ट की शरण में गई थी सीबीआई
सेना के अधिकारी ने सीनियर अफसरों को इस बात की जानकारी दी और इसके बाद पत्र लिखकर जवाब दिया, 'फौज केवल अधिकृत सिविल अथॉरिटी के निवेदन पर ही सिविल प्रशासन में किसी प्रकार की मदद करती है। इस बाबत सेना मुख्यालय के आदेश का इंतजार है।' सेना के इस जवाब के बाद सीबीआई ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद अदालत ने बिहार सरकार के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लालू की गिरफ्तारी के लिए सेना की मांग तक करने वाले यूएन विस्वास ने हालांकि आगे चलकर ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हो गए और ममता बनर्जी ने उन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय भी सौंप दिया था।












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