Yes Bank मामला: राणा कपूर और वधावन ब्रदर्स के खिलाफ सीबीआई ने कसा शिकंजा, दायर की चार्जशीट
नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग जांच मामले में गुरुवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर, डीएचएफएल के सह-संस्थापक कपिल और धीरज वधावन के खिलाफ चार्जशीट फाइल की है। सीबीई ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि जून, 2018 में डीएचएफएल डिबेंचर में यस बैंक के निवेश के बदले राणा कपूर और उनके परिवार के सदस्यों के नियंत्रण वाली कंपनियों को अनुचित लाभ मिला। इसी वर्ष यस बैंक ने डीएचएफएल के अल्पावधि डिबेंचर में 3,700 करोड़ रुपए का निवेश किया।

सीबीआई के सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 3,700 करोड़ रुपए के निवेश के बदले में राणा कपूर की पत्नी और बेटियों के स्वामित्व वाली डीओआईटी अर्बन वेंचर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को वधावन ने कथित तौर पर कर्ज के रूप में छह सौ करोड़ रुपए की रिश्वत दी। बता दें कि राणा कपूर के खिलाफ DHFL मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी जुड़ा हुआ है। यस बैंक की तरफ से जो कर्ज दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड को दिया गया था वह बाद में एनपीए घोषित हो गया। राणा पर आरोप है कि उन्होंने निजी लाभ के लिए कुछ कॉर्पोरेट को नियमों का उल्लंघन किया और कमजोर आधार पर भी लोन दिया था।
ये है YES Bank का पूरा मामला
बता दें कि बैंक ने एक के बाद एक ऐसी कई कंपनियों को लोन दिए हैं जो उसे लोन नहीं चुका पाई हैं। इसकी वजह से बैंक की बैलेंस शीट पर बैड लोन का बोझ बढ़ गया। यस बैंक ने जिन कंपनियों को लोन दिया है उनमें IL&FS, दीवान हाउसिंग फाइनेंस, जेट एयरवेज, कॉक्स एंड किंग्स, CG पावर, कैफे कॉफी डे, अल्टिको शामिल हैं। यस बैंक के लोन बुक का एक बड़ा हिस्सा इन कंपनियों के नाम है। ये कंपनियां लोन रीपेमेंट नहीं कर पाई जिसका असर यस बैंक पर पड़ा। यस बैंक के जितने लोन डूबे हैं उनमें से ज्यादातर उसने 2008 में दिए थे। उस वक्त इकोनॉमिक क्राइसिस थी।
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