Caste Census पर कांग्रेस के अंदर ही घमासान! क्या चुनाव के लिए इंदिरा और राजीव गांधी का अनादर कर रहे राहुल?
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राहुल गांधी की ओर से पार्टी के सत्ता में आने पर जाति जनगणना करवाए जाने के वादे का विरोध किया है। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चिट्ठी लिखकर कहा है कि इसे तो गलत अर्थ में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की विरासत के अनादर की तरह भी देखा जा सकता है।
खड़गे को लिखी चिट्ठी में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि कांग्रेस ने कभी भी इस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं किया और यह लोकतंत्र के लिए भी हानिकारक है। आनंद शर्मा की यह चिट्ठी अघोषित रूप से पार्टी के सबसे बड़े नेता के विचारों पर सीधे तौर पर सवाल उठाने की तरह है।

जाति जनगणना इंदिरा-राजीव के विचारों का अनादर?
शर्मा ने लिखा है, 'मेरी विनम्र राय में इसे (जाति जनगणना) गलत तरह से इंदिरा जी और राजीव जी की विरासत के अनादर के रूप में लिया जाएगा...' अपने विरोध पत्र में आनंद शर्मा ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का इन मुद्दों पर दिए गए बयानों का भी हवाला दिया है।
इंदिरा और राजीव गांधी के नारे और बयान का दिया हवाला
उन्होंने अपनी राय के समर्थन में 1980 में इंदिरा गांधी के नारे को कोट करते हुए लिखा है, 'ना जात पर ना पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर'। वहीं राजीव गांधी को कोट करते हुए कांग्रेस नेता ने लिखा है, '...अगर संसदीय और विधानसभा सीटों पर जातिवाद को एक फैक्टर बनाया जाएगा, तो हमें दिक्कत होगी...'
जाति जनगणना को कांग्रेस ने बनाया है बड़ा मुद्दा
बता दें कि राहुल गांधी बिहार में पिछले साल आई जाति जनगणना की रिपोर्ट के बाद इसे सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बना चुके हैं। वह 'जितनी आबादी, उतना हक' जैसे नारे दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई आरक्षण की 50% सीमा को खत्म करने के लिए संविधान बदलने तक के वादे कर रहे हैं।
हाल ही में संपन्न हुई मणिपुर से मुंबई तक कि अपनी 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' में राहुल गांधी ने हर जगह यह मुद्दा उठाया है और जातीय जनगणना को कांग्रेस पार्टी की मूल नीति की तरह पेश करने की कोशिश की है।
'जाति जनगणना बेरोजगारी का समाधान नहीं'
लेकिन, आनंद शर्मा ने अब जाकर कांग्रेस के अंदर से ही इस तरह की आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई है। उन्होंने लिखा है, 'कांग्रेस ने एक मास मूवमेंट के रूप में हमेशा राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर आंतरिक चर्चा और बहस के आधार पर सामाजिक मसलों पर नीतियों के निर्माण को प्रोत्साहित किया है..सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन हमेशा से ही सकारात्मक कार्यकलाप के लिए एकमात्र मार्गदर्शक मानदंड रहा है।'
कांग्रेस नेता ने राय दी है कि भारत के लोगों की जाति जनगणना को कांग्रेस का चुनावी वादा बनाना, बेरोजगारी और मौजूद असमानता का समाधान नहीं हो सकता। उनके मुताबिक मौलिक नीति से इस संवेदनशील विषय पर दूर होने से राष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस के 'ग्रुप-23' नेताओं में शामिल रहे हैं आनंद शर्मा
आनंद शर्मा ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उनका खत पारदर्शिता, लोकतांत्रिक चर्चा और अभिव्यक्ति की आजादी की उस भावना पर आधारित है, जिसमें कांग्रेस हमेशा से ही विश्वास करती थी।
बता दें कि आनंद शर्मा कांग्रेस के उस कथित ग्रुप-23 नेताओं का हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने एक तरह से कांग्रेस के अंदर गांधी परिवार के दबदबे को चुनौती दी थी। इस ग्रुप के कई बड़े नेता अब कांग्रेस छोड़ चुके हैं।












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