कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर को केंद्र ने दी मंजूरी, अब इलाहाबाद हाई कोर्ट होंगे शिफ्ट

Justice Yashwant Varma: कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर करने की मंजूरी केंद्र सरकार ने दे दी है। अब जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाएंगे, जो उनका मूल कार्यक्षेत्र भी रहा है। अब जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

जस्टिस यशवंत वर्मा तब विवादों में आए थे, जब उनके अधिकारिक आवास पर 14 मार्च 2025 को कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 'कैश एट होम मामले' को लेकर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इंटरनल इंक्वायरी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने पहले जस्टिस यशवंत वर्मा के ट्रांसफर के प्रस्ताव को वापस लेने का अनुरोध किया था।

Justice Yashwant Varma

केंद्र सरकार ने जस्टिस यशवंत का ट्रांसफर करते हुए क्या दिया आदेश?

केंद्र सरकार ने शुक्रवार 28 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की अधिसूचना जारी की। आदेश में कहा गया है, "भारत के संविधान के अनुच्छेद 222 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित करते हैं और उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपना कार्यभार संभालने का निर्देश देते हैं।"

जस्टिस यशवंत वर्मा क्यों हैं विवादों में?

कथित तौर पर कैश मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के निर्देश के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटा दिया था।

विवाद तब पैदा हुआ जब 14 मार्च को उनके लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लग गई, जिसके बाद कथित तौर पर एक स्टोररूम में नकदी की जली हुई गड्डियां मिलने की खबरें सामने आईं। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इन दावों काखंडन करते हुए कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार ने वहां कोई नकदी रखी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए 22 मार्च को तीन सदस्यीय इन-हाउस कमेटी नियुक्त की। इस बीच मामले में एफआईआर की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को समय से पहले खारिज कर दिया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि इन-हाउस जांच जारी है और इसके खत्म होने के बाद सीजेआई के पास कई विकल्प खुले हैं।

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