Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Vikrant Vij : 'चार दिन की जिंदगी और आज आखिरी...' कैंसर का इलाज, 3600 लोगों को खाना खिलाना

विक्रांत विज बताते हैं कि उनका एक दोस्त कहता है, 'चार दिन की जिंदगी और आज आखिरी दिन है।' वे इसी फॉर्मूले पर जीते हैं। cancer warrior vikrant vij apurva foundation food for cancer patients in delhi

नई दिल्ली, 29 सितंबर : इंसान की जिंदगी में अगर कैंसर जैसी बीमारी आ जाए तो आधी मौत सुनने के साथ ही हो जाती है। यह बीमारी इतनी खौफनाक है कि इसका नाम सुनते के साथ ही मरीज के साथ पूरे परिवार की हालत खस्ता हो जाती है। इसका कारण है कि इलाज महंगा होने के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी काफी चैलेंजिंग भी होता है। ये कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसे डॉक्टर ने कहा, केवल छह महीने की जिंदगी बची है। हालांकि, इस शख्स ने दिखाया कि हौसला बीमारी से बड़ा होता है। ये शख्स आज हजारों लोगों को खुशियां बांटने में जुटा है। (सभी फोटो-साभार फेसबुक @vikrantvij1979 और @ACOthehelpinghand)

कैंसर में कीमोथेरेपी जैसी ट्रीटमेंट

कैंसर में कीमोथेरेपी जैसी ट्रीटमेंट

कैंसर की दवाएं शरीर पर कई तरह के असर डालती हैं। इसमें सबसे पहले बालों का झड़ना होता है। शरीर के दूसरे अंग भी सामान्य तरीके से काम नहीं करते क्योंकि कीमोथेरेपी जैसी ट्रीटमेंट के कारण लगातार उल्टियां होती हैं। दिल्ली के रहने वाले विक्रांत विज बताते हैं कि उनका एक दोस्त कहता है, 'चार दिन की जिंदगी और आज आखिरी दिन है।' वे इसी फॉर्मूले पर जीते हैं।

गर्दन से शुरू हुई बीमारी पूरे शरीर में फैली

गर्दन से शुरू हुई बीमारी पूरे शरीर में फैली

विक्रांत विज बताते हैं कि दिसंबर 2020 में 41 साल की उम्र में उनकी तबीयत काफी अधिक बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने दवाएं दीं। कोरोना महामारी भी शुरू हो गई थी। तीन महीने तक दवाएं खाने के बाद भूख लगनी बंद हो गई। शारीरिक बदलाव होने लगे। जांच कराने के बाद कैंसर (Lymphoma) का पता लगा। डॉक्टर ने कहा, गर्दन से शुरू हुई ये बीमारी पूरे शरीर में फैल चुकी है और चौथे स्टेज का कैंसर है।

हार तब होती है जब वह गिरने के बाद...

हार तब होती है जब वह गिरने के बाद...

दरअसल, अगर कोई इंसान अपनी मानसिक मजबूती और हौसले के दम पर डॉक्टरों के अनुमान को झुठला दे तो वह काफी इंस्पायरिंग होता है। कैंसर वॉरियर विक्रांत विज की कहानी इसी संकल्प के जीतने की है। वे कहते हैं कि बॉक्सर तब नहीं हारता जब वो गिरता है, हार तब होती है जब वह गिरने के बाद उठने से मना कर देता है।

नौ कीमोथेरेपी करा चुके विक्रांत

नौ कीमोथेरेपी करा चुके विक्रांत

विक्रांत का किरदार ऐसे बेटे का है जो अपने घर में सबसे बड़ा है। जब उसे कैंसर डायग्नोस हुआ तो डॉक्टर ने छोटे भाई से बताया कि तुम्हारे भाई के पास अधिकतम 6 महीने हैं। इलाज का खर्च तकरीबन 25 लाख रुपये बताया गया। जुलाई 2022 तक नौ कीमोथेरेपी करा चुके विक्रांत बताते हैं कि उनके पिता की मौत के बाद वे टूट चुके थे। हालांकि, पिता की मौत से उन्हें मजबूती भी मिली।

कैंसर की ट्रीटमेंट के दौरान पिता को खोया

कैंसर की ट्रीटमेंट के दौरान पिता को खोया

पिता की मौत के बारे में विक्रांत कहते हैं कि दो कीमोथेरेपी के बाद तीसरी कीमोथेरेपी कराने जा रहे थे। मां ने नाश्ते के लिए आवाज लगाई, लेकिन पापा ने जवाब नहीं दिया। बेहोशी की हालत में पापा को अस्पताल ले गए, लेकिन डेड डिक्लेयर कर दिया गया। मौत के कारण का पता नहीं लगा। ऐसे विपरीत हालात में भी दोनों भाइयों ने हौसला नहीं खोया।

युवराज सिंह की वीडियो से मिली मोटिवेशन

युवराज सिंह की वीडियो से मिली मोटिवेशन

बकौल विक्रांत, शुरुआती चरण में ट्रीटमेंट की कॉस्ट और परिवार के सामने भावनात्मक चुनौतियां थीं, लेकिन तमाम चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए कैंसर से रिकवर फील करते हैं। शानदार जीवन जी रहे विक्रांत बताते हैं कि उनके पास कोई ऑप्शन नहीं था। खुद से लड़ाई लड़ी। क्रिकेटर युवराज सिंह की वीडियो देखने के बाद उन्हें काफी प्रोत्साहन मिली। उन्हें हौसला मिला की कैंसर पेशेंट वर्ल्डकप में शानदार प्रदर्शन कर सकता है तो मैं भी कर सकता हूं।

कीमोथेरेपी कराने के बाद सेवा की शुरुआत

कीमोथेरेपी कराने के बाद सेवा की शुरुआत

भले ही विक्रांत की लाइफ में शारीरिक बदलाव स्पष्ट दिखते हैं, लेकिन उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई है। पूरे परिवार का सहारा बने विक्रांत अपनी मुहिम के बारे में बताते हैं कि पहली कीमोथेरेपी कराने सफदरजंग अस्पताल गए। डॉक्टर ने कहा, कुछ खाना खा लीजिए। कैंटीन में एक महिला और उनकी बेटी रोती हुई मिली। पूछने पर पता लगा, कैंसर का ट्रीटमेंट करा रहे हैं। तीन दिन बाद दोबारा बुलाया है, लेकिन न खाने के पैसे हैं और न घर जाने के। इसके बाद विक्रांत विज ने उन्हें चाय नाश्ता ऑफर किया। फोन नंबर एक्सचेंज कर उनकी मदद की। इसके बाद खुद की कीमोथेरेपी कराने के बाद भी दिमाग में मां-बेटी की कहानी घूमती रही। एहसास हुआ कि कितने लाचार लोग हैं, जो कैंसर से जूझने के अलावा खाने से भी वंचित हैं। पहली बार पांच लोगों को खाना खिलाया।

सैकड़ों लोगों को घर का खाना

सैकड़ों लोगों को घर का खाना

विक्रांत विज को जो बात खास बनाती है वह यह कि कैंसर की ट्रीटमेंट कराने के दौरान उन्होंने अपने जैसे कोई और मरीजों की पीड़ा को महसूस किया। कीमोथेरेपी के भयंकर दौर से गुजरने के बावजूद वे सैकड़ों लोगों को घर का खाना खिलाते हैं। विक्रांत बताते हैं कि कीमोथेरेपी में डॉक्टरों की सलाह होती है कि मरीज पौष्टिक खाना खाए, क्योंकि रोग का मुकाबला करना थोड़ा आसान हो जाता है। ऐसी कठिन परिस्थिति में भी कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास एक वक्त की रोटी खाने तक के पैसे नहीं बचते हैं।

पापा का सपना- अपूर्वा द हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन

पापा का सपना- अपूर्वा द हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन

विक्रांत बताते हैं कि वे हफ्ते में तीन दिन अस्पताल के बाहर लोगों को खाना खिलाने आते हैं। वे इसे सेवा का नाम देते हैं। कीमोथेरेपी सेशन के दौरान उन्होंने मां की मदद से सफदरजंग अस्पताल के बाहर हजारों लोगों को भोजन मुहैया कराते हैं। इलाज कराने आ रहे दूसरे राज्यों के मरीज और बाकी लोगों के लिए खाने के इंतजाम के लिए अब विक्रांत NGO- अपूर्वा द हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन बना चुके हैं। वे बताते हैं कि पिता का भी सपना था कि वे एक एनजीओ संचालित करें। कोरोना काल में कीमोथेरेपी सेशन के तुरंत बाद लोगों को खाना खिलाने के बारे में डॉक्टर को पता लगा। उन्होंने आगाह किया, लेकिन सेवा और लोगों की दुआओं का असर है कि सब कुछ ठीक से चल रहा है।

महीने में करीब 3600 लोगों को खाना

महीने में करीब 3600 लोगों को खाना

मां की सहमति मिलने के बाद 5 लोगों को खाना खिलाने का विक्रांत का सफर अब एक दिन में 300 लोगों को भोजन कराते हैं। मतलब हफ्ते में तीन दिन के हिसाब से महीने में करीब 3600 लोगों को विक्रांत विज खाना खिला रहे हैं। वे बताते हैं कि दिसंबर 2020 के बाद नौ चरणों की कीमोथेरेपी और आज जिंदा रहना लोगों की दुआओं का असर है। सैकड़ों लोगों को खाना खिलाने की खुशी का जिक्र कर विक्रांत बाकी परेशानियों को बेमानी साबित कर रहे हैं। वे बताते हैं कि खाना तैयार कराने के बाद उन्हें पैक करा कर अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजनों को भोजन कराते हैं। बोनस लाइफ में कैंसर पेशेंट के लिए कुछ करने की चाह मोटिवेट करती है।

'बोनस लाइफ' में सेवा की मुहिम

'बोनस लाइफ' में सेवा की मुहिम

जब डॉक्टर ने कहा, बस 6 महीने और बचे हैं। ऐसे में वे खुद कैसे मोटिवेट होते हैं, इस पर विक्रांत बताते हैं कि डॉक्टर के अनुमान के बाद जो भी लाइफ मिली है वह इसे नया जन्म या बोनस के रूप में देखते हैं। कैंसर अस्पताल बनवाने का सपना देखते हैं। 'बोनस लाइफ' में सेवा की मुहिम चला रहे विक्रांत को मां स्वर्णलता विज, छोटे भाई अभिषेक, अभिषेक की पत्नी नीतू और बेटी अपूर्वा विज समेत कई और लोगों का भी सहयोग मिलता है। वे कहते हैं कि हर दिन कम से कम एक हजार लोगों को खाना खिलाने का सपना देखते हैं। पिछले 18 महीनों का सफर याद कर विक्रांत कहते हैं कि उन्हें किसका आशीर्वाद मिला है, नहीं पता, लेकिन अब बोनस लाइफ लोगों की सेवा में जीना है।

पीड़ित दिल खोलकर दुआएं देते हैं

पीड़ित दिल खोलकर दुआएं देते हैं

दरअसल, एक ऐसे दौर में जब इंसान खुद की जरूरतों और ख्वाहिशों को पूरा करने की जद्दोजहद में एक-एक गंवा रहा है, विक्रांत का समर्पण और दूसरों की पीड़ा का एहसास करना काफी प्रेरित करने वाला है। उन्होंने कीमोथेरेपी के 9 सेशन पूरे कर लिए हैं। डॉक्टरों ने 6 महीने का ब्रेक दिया है। इसके बाद आगे की लाइन ऑफ़ ट्रीटमेंट पर फैसला टेस्ट कराने के बाद लिया जाएगा। जिन जरूरतमंद और वंचित लोगों तक विक्रांत और उनके परिवार ने खाना पहुंचाया है, वे तमाम लोग इनकी मदद से आह्लादित हैं। तमाम पीड़ित दिल खोलकर दुआएं देते हैं। अपने इष्ट से विक्रांत को लंबी आयु देने की प्रार्थना करते हैं।

दूसरों की पीड़ा भी महसूस कर सकते हैं

दूसरों की पीड़ा भी महसूस कर सकते हैं

खुद कई असह्य बीमारियों से जूझ रहे पीड़ित यह कहते भी सुने जा सकते हैं कि हम से पहले विक्रांत की तबीयत ठीक हो जाए, क्योंकि इस दुनिया को ऐसे लोगों की जरूरत है। बहरहाल, विक्रांत की पर्सनैलिटी हम सबके सामने एक नजीर है। यह दिखाता है कि भले ही आपके सामने कैसी भी परेशानी क्यों न आए, अगर आपके पास संवेदना और करुणा है, तो आप दूसरों की पीड़ा भी महसूस कर सकते हैं। न केवल पीड़ा महसूस कर सकते हैं, बल्कि छोटे स्तर से लोगों की मदद की शुरुआत करने के बाद विक्रांत जैसी बड़ी मुहिम चलाकर जीवन में सार्थक संदेश दे सकते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+