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कैंसर से जूझते ऑटो ड्राइवर को मदद की ज़रूरत

नई दिल्ली। देश में लाखों लोग आज कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं। हर मरीज़ की अपनी कहानी है, जो बेपनाह ग़म से भरी है। ऐसी ही एक कहानी है गुजरात के वलसाड में रहने वाले ऑटो ड्राइवर की।

वलसाड की सड़कों पर ऑटो चलाकर अपना और परिवार का पेट पालने वाले कल्पेश गुप्ता हंसी-खुशी ज़िंदगी बिता रहे थे।

सभी कुछ ठीक था लेकिन साल 2012 में जांच के बाद पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। 2012 में कठिनाइयों के साथ उन्होंने अपना इलाज कराया।

Kalpesh

इलाज के बाद कल्पेश को लगने लगा था कि उनकी ज़िंदगी पहले जैसी स्वस्थ्य हो जाएगी लेकिन उन पर दुखों का पहाड़ फिर टूट पड़ा।

इलाज के बावजूद साल 2016 में दुर्भाग्यवश कैंसर ने फिर कल्पेश को अपने शिकंजे में ले लिया। डॉक्टरों के मुताबिक कल्पेश की ज़िंदगी बचाने का एकमात्र उपाय बोन मैरो ट्रांसप्लांट हैं लेकिन कल्पेश के पास अब इतने पैसे नहीं बचे हैं कि वो अपना इलाज करा सकें।

इलाज के कारण बंद हुआ रोजगार

पूरी तरह से इलाज कराने के लिए कल्पेश को अपना ऑटो ड्राइवर का काम छोड़ना पड़ा। पहली बार इलाज के बाद दोबारा कैंसर की चपेट में आने के कारण उन्हें पूरी तरह आराम की सलाह दी गई, जिसके बाद वो अहमदाबाद के अपोलो अस्पताल में भर्ती हुए।

11 महीने का बच्चा कर रहा इंतज़ार

अस्पताल में ब्लड कैंसर से जूझने वाले कल्पेश का 11 महीने का बच्चा भी है। जो उनकी स्वस्थ्य वापसी का इंतज़ार कर रहा है। कल्पेश खुद चाहते हैं कि वो अपनी बाकी ज़िंदगी बच्चे साथ खुशी से बिता सकें।

आखिरी विकल्प है बोन मैरो

अस्पताल में भर्ती कल्पेश के कैंसर सेल्स को कीमोथैरेपी के ज़रिए कम किया जा रहा है लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक पूरी तरह इलाज का एकमात्र उपाय बोन मैरो ट्रांसप्लांट है।

इस पूरे ट्रांसप्लांट का पूरा खर्च 25 लाख रुपए है और पहले ही इलाज में अपनी जमा-पूंजी खर्च कर चुके कल्पेश और उनके परिवार के लिए इतना पैसा जमा करना एक बड़ी चुनौती है।

इकलौते कमाने वाले शख़्स थे कल्पेश

अहमदाबाद के अपोलो अस्पताल के न्यूट्रोपेनिक वार्ड में भर्ती कल्पेश रोज़ाना आने वाले बिल को चुकाने में जूझ रहे हैं। कल्पेश का कहना है कि उनके पास इतना पैसा और संसाधन नहीं है कि आगे का इलाज जारी रख सकें। कल्पेश घर में कमाने वाले अकेले शख़्स थे लेकिन बीमारी ने उनका रोजगार भी छीन लिया

कल्पेश की मदद के लिए हाथ बढ़ाइए:

स्टोरी स्त्रोत: Millap.org

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