क्या दो डोज के बीच बदल सकते हैं कोरोना वैक्सीन का ब्रांड? सरकार की ओर से आया ये जवाब
नई दिल्ली, मई 22: कोरोना वायरस की दूसरी भयानक लहर के बीच देश में वैक्सीनेशन जारी है। इसी बीच देश में कोरोना वैक्सीन की भारी कमी देखने को मिल रही है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें कोरोना वैक्सीन की पहली डोज तो लग गई लेकिन दूसरी डोज के लिए उन्हें वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। फिलहाल भारत में जो कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही हैं उनकी दो डोज लगवानी जरूरी हैं। वैक्सीन के दोनों डोज के बीच 28 दिन (4 हफ्ते) का गैप रखने की बात कही गई है। जिसे हाल ही और बढ़ाया गया है।

'वैज्ञानिक और सैद्धांतिक रूप से यह संभव है लेकिन...'
वैक्सीनेशन की इसी प्रक्रिया से जुड़ा एक सवाल लोगों को परेशान कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर किसी शख्स ने वैक्सीन का पहला डोज ले लिया है क्या वह दूसरा डोज दूसरी कंपनी की वैक्सीन का ले सकता है। इस सवाल का अब नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल की ओऱ से इस पर जवाब आया है। आज मीडिया से बात करते हुए वीके पॉल ने कहा कि, वैज्ञानिक और सैद्धांतिक रूप से यह संभव है।, लेकिन क्या इसकी सिफारिश की जाएगी, इसपर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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सरकार की ओर से कही गई ये बात
वीके पॉल ने आगे कहा कि, इस सवाल का अभी कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं, केवल समय ही बताएगा। इससे पहले देश में कुछ डॉक्टरों ने दावा किया था कि, आपने कोरोना से बचने के लिए जो भी टीका चुना है चाहे वह कोवैक्सीन हो या कोविशील्ड हो, आपको वैक्सीन की दूसरी डोज भी उसी की लगवानी होगी जो आपने पहले डोज के रूप में लगवाई है।

Amphotericin B दवा के उत्पादन को बढ़ा रही है सरकार
वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रटरी लव अग्रवाल ने ब्लैक फंगस की दवा की कमी के मुद्दे पर कहा कि, ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Amphotericin B देश में सीमित मात्रा में उपलब्ध थी। इसकी उपलब्धता के बढ़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य के साथ औषधि मंत्रालय सहयोग करके 5 और निर्माताओं को इसके उत्पादन के लिए लाइसेंस देने जा रहा है। उन्होंने कहा कि, केवल 7 राज्यों हर दिन 10 हजार से ज्यादा नए कोरोना के मामले रिपोर्ट आ रहे हैं। 6 राज्यों में 5,000 से 10,000 केस आ रहे हैं।












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