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फूलपुर उपचुनाव: बीजेपी-एसपी में कांटे की टक्कर, जानिए पटेल वोटर जरूरी क्यों हैं?

By Vikashraj Tiwari
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    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा छोड़ी गई फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव बीजेपी के लिए नाक का सवाल बना हुआ है। शुक्रवार को उप चुनाव के लिए प्रचार खत्म हो जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी जैसे मुद्दे वोटरों के जातीय समीकरण के आगे फीके पड़ जाते हैं। फूलपुर लोकसभा उपचुनाव भी इससे अछूता नहीं हैं। चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दल अहम मुद्दों को दरकिनार करते हुए जातीय गणित बिठा रहे हैं। पटेल बहुल संसदीय क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही पार्टियों ने चुनावी मैदान में पटेल उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। मुस्लिम समुदाय के वोटरों पर दावा ठोंकते हुए एक माफिया चुनाव मैदान में हैं।

    फूलपुर में जातीय समीकरण काफी दिलचस्प है

    फूलपुर में जातीय समीकरण काफी दिलचस्प है

    फूलपुर लोकसभा भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का संसदीय क्षेत्र रहा है। फूलपुर में जातीय समीकरण काफी दिलचस्प है। इस संसदीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा पटेल मतदाता हैं, जिनकी संख्या करीब सवा दो लाख है। मुस्लिम, यादव और कायस्थ मतदाताओं की संख्या भी इसी के आसपास है। लगभग डेढ़ लाख ब्राह्मण और एक लाख से अधिक अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। फूलपुर की सोरांव, फाफामऊ, फूलपुर और शहर पश्चिमी विधानसभा सीट ओबीसी बाहुल्य हैं। इनमें कुर्मी, कुशवाहा और यादव वोटर सबसे अधिक हैं।

     भाजपा और सपा दोनों पार्टियों ने पटेल उम्मीदवार उतारा है

    भाजपा और सपा दोनों पार्टियों ने पटेल उम्मीदवार उतारा है

    फूलपुर लोकसभा सीट के लिए भाजपा और सपा दोनों पार्टियों ने पटेल उम्मीदवार उतारा है। भाजपा की तरफ से कौशलेंद्र सिंह पटेल प्रत्याशी हैं वहीं सपा ने नागेंद्र सिंह पटेल पर दांव खेला है। कांग्रेस ने मनीष मिश्रा को टिकट दिया है। बहुजन समाज पार्टी इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है। सुप्रीमो मायावती ने सपा प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया है। भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि ब्राह्मण और वैश्य उनका परंपरागत वोटर है। कौशलेंद्र पटेल को प्रत्याशी बनाने के पीछे भाजपा की सोच है कि वो ग्रामीण क्षेत्र से पटेल वोट ला पाएंगे। फूलपुर में पटेल जाति के वोटरों की संख्या सर्वाधिक है। इस चुनाव में सपा प्रत्याशी नागेंद्र पटेल को बसपा का समर्थन मिला है।

    सपा को भरोसा है कि यादव और दलित वोटर उसके खेमे में आ जाएंगे

    सपा को भरोसा है कि यादव और दलित वोटर उसके खेमे में आ जाएंगे

    सपा को भरोसा है कि यादव और दलित वोटर उसके खेमे में आ जाएंगे
    सपा को भरोसा है कि यादव और दलित वोटर उसके खेमे में आ जाएंगे। नागेंद्र पटेल क्षेत्रीय नेता हैं। वो पटेल वोटरों को भी लुभाएंगे। इसके अलावा सपा को मुस्लिम वोट मिलने की भी उम्मीद है। हालांकि इस रात में माफिया अतीक अहमद एक बड़ा रोड़ा हैं। उन्हें इस उपचुनाव में वोटकोटवा की भूमिका में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट देकर अपनी जमीन तलाशने की कोशिश की है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर सीट के लिए 11 मार्च को मतदान होंगे। मतों की गिनती 14 मार्च को होगी।

    सपा का मजबूत गढ़

    सपा का मजबूत गढ़

    दरअसल फूलपुर सीट पर एसपी का भी मजबूत जनाधार है। यही वजह है कि 1996 से लेकर 2004 तक समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार यहां से लगातार जीतता रहा है। फूलपुर लोकसभा सीट से कुर्मी समाज के कई सांसद बने हैं। प्रो. बी.डी. सिंह, रामपूजन पटेल (तीन बार), जंग बहादुर पटेल (दो बार) एसपी के टिकट पर सांसद रह चुके हैं। इसके बाद एसपी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक अहमद को फूलपुर से प्रत्याशी बनाया जो विजयी रहे, लेकिन इसके बाद 2009 के चुनाव में बीएसपी के टिकट पर पंडित कपिल मुनि करवरिया चुने गए और 2014 में बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य।

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    English summary
    Campaign ends today for Phulpur bypolls, tight contest between sp and bjp,BJP talks up development

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