CAB Protest: भाजपा के सांसदों ने भी माना, हालात तनावपूर्ण, लोगों में डर और भ्रम की स्थिति
नई दिल्ली। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन बिल को पास कर दिया गया है। इस बिल का विपक्ष ने संसद के दोनों सदन में भारी विरोध किया, लेकिन विरोध के बावजूद इस बिल को दोनों सदनों में पास कर दिया गया। एक तरफ जहां विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया तो दूसरी तरफ भाजपा के सांसद भी मानते हैं कि इस बिल को लेकर लोगों में डर और चिंता का माहौल है।

लोगों में भ्रम
असम से भाजपा के तीन सांसदों ने इस बिल को लेकर बड़ी बात कही है, उन्होंने कहा कि इस बिल की वजह से लोगों के भीतर काफी तनाव और चिंता है। लोगों में बिल को लेकर काफी असमंजश की स्थिति है। हालांकि तमाम सांसदों का कहना है कि जिस तरह से प्रदर्शन किया जा रहा है वह कतई सही तरीका नहीं है। तेजपुर से भाजपा सांसद पल्लब लोचन दास ने कहा कि मुद्दा यह है कि जिस तरह से इस बिल को लोगों के बीच पेश किया गया वह सही नहीं है। लोगों में भ्रम फैलाया गया कि यहां लाखों लोग रहने आएंगे, लेकिन उन्हें कट ऑफ तारीख के बारे में नहीं बताया गया।

कदम उठाने की जरूरत
दास ने कहा कि असम में लोगों को भय है कि उनकी भाषा खत्म हो जाएगी और यहां आसामी की जगह बंगाली भाषा बोली जाने लगेगी और यहां के लोग अल्पसंख्यक हो जाएंगे। हमे कई अहम कदम उठाने की जरूरत है। लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए सरकार को यहां की भाषा को संरक्षित करने का कानून लाना चाहिए। यहां 6 समुदाय ऐसे हैं जो एसटी श्रेणी की मांग कर रहे हैं, हमे इसके लिए कदम उठाने होंगे।

लोगों में गलतफहमी
गुवाहाटी से भाजपा सांसद क्वीन ओजा ने कहा कि हालात काफी खराब हैं, यह अच्छा नहीं है। कल के बारे में मैं नहीं जानता। लोगों में गलतफहमी है। लोगों को सही चीजों की जानकारी देनी चाहिए, यह काफी बदतर हो रहा है। ओजा ने कहा कि लोगों के भीतर इस बात का भय है कि अगर बांग्लादेशियो को नागरिकता दी गई तो यहां के लोगों की पहचान खत्म हो जाएगी। मैं उनकी चिंता को समझती हूं, यह जायज है। मैं लोगों के विरोध का समर्थन करती हूं।

हालात चिंताजनक
मंगलदोई से भाजपा सांसद दिलीप सैकिया ने कहा कि हालात काफी तनावपूर्ण हैं। स्थानीय लोग चिंतित हैं कि यहां लाखों लोग आएंगे और उनके अधिकार व जीविकोपार्जन का जरिया छीन लेंगे, उनकी भाषा खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जोकि इसे लागू कराने को सुनिश्चित करेगी। हम हालात को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि हमारी भाषा सुरक्षित रहे।












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