बराक ओबामा की पसंद से जयपुर के प्रतीक कुहाड़ बने स्टार

बराक ओबामा की पसंद से जयपुर के प्रतीक कुहाड़ बने स्टार

पिछले साल दिसंबर में प्रतीक कुहाड़ नई दिल्ली में अपने घर पर बैठे थे कि तभी उनके फ़ोन पर अचानक सैकड़ों मैसेज आए गए.

''क्या तुमने ये देखा, ये बहुत बड़ी बात है.''

गायक प्रतीक कुहाड़ कहते हैं, ''मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो किस बारे में बात कर रहे हैं.''

लेकिन, थोड़ी बाद उन्हें समझ आया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के पसंदीदा गानों की सूची में उनका एक गाना 'कोल्ड मैस' भी शामिल हो गया है.

वो गाना जो अमेरिका की चार्टबीट्स में भी नहीं आया था लेकिन वो ओबामा के 35 पसंदीदा गानों की सूची में आ गया. इस सूची में ब्रूस स्प्रिंग्सटीन, दबेबी, लिज़ो और बियोंसे के गाने भी शामिल हैं.

कुहाड़ कहते हैं कि उन्हें बिल्कुल भी पता नहीं है कि ये गाना बराक ओबामा तक कैसे पहुँचा लेकिन इससे उन्हें करियर में बहुत बढ़ावा मिला.

वह कहते हैं, ''यह बहुत अजीब बात थी. ये सब अचानक से हो गया.''

प्रतीक भारतीय हैं लेकिन 2016 में पहली बार रिलीज़ हुआ उनका ये गाना तड़क-भड़क वाले बॉलीवुड गानों से अलग है. यह अंग्रेज़ी भाषा में है और बहुत शांत संगीत के साथ बनाया गया है. ये दो प्रेमियों की कहानी है जिनके रिश्ते में टकराव है लेकिन वो अलग भी नहीं हो पा रहे हैं.

बराक ओबामा की पसंद से जयपुर के प्रतीक कुहाड़ बने स्टार

बनाई कोल्ड मैस की एल्बम

प्रतीक कुहाड़ ने चार साल पहले एक कॉन्सर्ट में इसे गाया था जिसे लोगों ने काफ़ी पसंद किया था.

वो कहते हैं, ''जिस शो में किसी ने भी पहले से वो गाना नहीं सुना था, उसमें इसे लेकर मुझे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. तब मुझे समझ आ गया कि ये गाना ख़ास होने वाला है.''

इससे प्रेरणा लेकर उन्होंने छह और गानों की एक छोटी एल्बम बनाई. ये सभी गाने उसी रिश्ते के इर्दगिर्द बनाए गए.

भारत में पहले से था लोकप्रिय

ओबामा के पसंदीदा गानों में आने से पहले भी ये गाना भारत में काफ़ी पसंद किया जा चुका था जो कि कई लोगों के लिए हैरानी वाली बात भी थी.

प्रतीक कुहाड़ कहते हैं, ''भारत में ये आम धारणा है कि यहां सफल होने के लिए हिंदी गायक होना ज़रूरी है. इंग्लिश गानों के साथ आप सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई में एक छोटे से ख़ास वर्ग तक ही पहुंच बना सकते हैं लेकिन, कोल्ड मैस ने इस धारणा को तोड़ दिया.''

पिछले साल के अंत में ही प्रतीक कुहाड़ ने दिल्ली के गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसेज में नौ हज़ार दर्शकों के सामने ये गाना गाया था.

साल 2011 मे उनके पहले गाने 'समथिंग रॉन्ग' के रिलीज़ होने के बाद आठ साल की कड़ी मेहनत से उनके करियर ने धीरे-धीरे उड़ान भरी है.

बराक ओबामा की पसंद से जयपुर के प्रतीक कुहाड़ बने स्टार

जयुपर में पले-बढ़े

प्रतीक कुहाड़ का जन्म जयपुर में हुआ था और वो वहीं पर पले-बढ़े हैं. उन्होंने छह साल की उम्र में गिटार बजाना शुरू किया था लेकिन शुरुआत में ये उन्हें बहुत पसंद नहीं आया.

वह हँसते हुए बाताते हैं, ''मैंने गिटार की छह क्लास लेने के बाद ही उसे छोड़ दिया था क्योंकि वो बहुत मुश्किल था. फिर बाद में हाई स्कूल के दौरान गिटार क्लास ली लेकिन उसमें फेल हो गया.''

हालांकि, अपनी रूचि के कारण प्रतीक कुहाड़ जहां से भी संभव हो संगीत सुनने और सीखने की कोशिश करते थे. उनके समय में इंटरनेट नहीं था तो ऐसे में उनकी बहन की दोस्त ने उनकी संगीत सीखने में मदद की.

वह बताते हैं, ''वह बेंगलुरु में रहती थीं जो एक बड़ा शहर है. वो वहां से मेरी बहन को गानों के कैसेट भेजा करती थीं. इससे मैंने उस समय बहुत सारे लोकप्रिय गाने सुने.''

2008 में प्रतीक ने न्यू यॉर्क यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंस में दाखिला लिया और गणित,अर्थशास्त्र में संयुक्त डिग्री प्राप्त की. वह फाइनैंस के क्षेत्र में काम करना चाहते थे.

लेकिन, अमेरिका में रहते हुए वो एलिअट स्मिथ, लॉरा मार्लिंग और निक ड्रेक जैसे गायकों-गीताकरों से मिले और उनका रुझान फिर से संगीत की ओर हो गया.

उन्होंने पूरी दिलचस्पी के साथ गिटार बजाना, अपने गाने लिखना और लाइव परफॉर्मेंस देना शुरू किया.

प्रतीक कुहाड़
Getty Images
प्रतीक कुहाड़

नौकरी या म्यूज़िक में उलझन

इस सबके बावजूद भी प्रतीक कुहाड़ म्यूज़िक में करियर बनाने को लेकर ठीक से फ़ैसला नहीं कर पाए थे. वह कहते हैं, ''म्यूज़िक कभी मेरे लिए करियर का विकल्प या बहुत गंभीरता से किया जाने वाला काम नहीं हो सकता था.''

इसके बाद उन्होंने कंसल्टेंट का काम शुरू किया लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्हें अहसास हुआ कि वो इस काम के लिए नहीं बने हैं.

वह कहते हैं, ''कुछ भी ठीक नहीं था. मुझे ख़ुद पर शक हो रहा था. तभी मेरे दिल से 'समथिंग रॉन्ग' गाना निकला.'' नौकरी छोड़ने के बाद ये गाना उनका पहला अपना गाना था. इसके बाद वो वापस नई दिल्ली आ गए.

हालांकि, प्रतीक कहते हैं कि ये गाना अब लोगों को ख़ास पसंद नहीं आएगा. वो बहुत लापरवाही में लिखा गया था और उसका प्रोडक्शन भी औसत था.

उन्हें 2013 में आई अपनी अगली रिलीज़ 'रात राज़ी' पसंद हैं जो उनका पहला गंभीर गाना था. ये हिंदी में था जिसने उन्हें पहचान दिलाई थी.

बराक ओबामा की पसंद से जयपुर के प्रतीक कुहाड़ बने स्टार

जेफ भास्कर से मिली सलाह

म्यूज़िक इंडस्ट्री के दिग्गज माने जाने वाले जेफ भास्कर की एक सलाह भी उनके काफ़ी काम आई.

जेफ भास्कर ने भारत में एक मास्टर क्लास लेते हुए प्रतीक का म्यूज़िक सुना था. उन्होंने प्रतीक के म्यूज़िक में और मेलोडी की ज़रूरत बताई थी.

प्रतीक कुहाड़ कहते हैं कि उन्हें इससे काफ़ी मदद मिली और उन्होंने मेलोडी पर भी ध्यान देना शुरू किया.

भले ही उनके एक्सटेंडेट प्ले (गानों की छोटी एल्बम) ने प्रतीक कुहाड़ को बड़ी पहचान दिलाई थी लेकिन फिर भी उन्हें कोल्ड मैस के ज़्यादा लोगों तक ना पहुंच पाने का दुख होता था.

वह कहते हैं कि इसलिए वो एलकेट्रा रिकॉर्ड्स के साथ इस एल्बम को फिर से रिलीज़ करने वाले हैं.

इस दौरान प्रतीक कुहाड़ ने 'कसूर' नाम से भारत में एक गाना भी रिलीज़ किया है जो लॉकडाउन से जुड़ा लग रहा है. लेकिन, प्रतीक का कहना है कि उन्होंने एक साल पहले ही इसके बारे में सोच लिया था.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+