2026 तक देश में ड्रोन उद्योग से 15,000 करोड़ का टर्नओवर, Air India के विनिवेश पर ये बोले सिंधिया

नई दिल्ली, 16 सितंबर: नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि देश में 2026 तक ड्रोन उद्योग का कुल टर्नओवर 15,000 करोड़ रुपय तक हो जाएगा। उन्होंने कहा है कि बुधवार को ही केंद्र सरकार ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) की घोषणा करके और पिछले महीने नियमों को आसान बनाकर इस क्षेत्र को बहुत ज्यादा बढ़ावा दिया है। उधर एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर उन्होंने कहा है कि सरकार पूरी प्रक्रिया के तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने की उम्मीद कर रही है। बता दें कि एयर इंडिया पर करीब 43 हजार करोड़ का कर्ज बकाया है।

'ड्रोन निर्माण से करीब 10,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे'

'ड्रोन निर्माण से करीब 10,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे'

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को कहा कि सरकार अगले 3 वर्षों में ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में करीब 5,000 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगा रही है। उन्होंने कहा है कि 'इससे करीब 10,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी।' उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) से अगले 3 साल में ड्रोन निर्माण से 900 करोड़ रुपये का टर्नओवर मिलने वाला है। इसी आधार पर वे बोले कि 'हमारा अनुमान है कि 2026 तक ड्रोन उद्योग 15,000 करोड़ रुपये का होगा।' उनके मुताबिक, 'ड्रोन नीति और ड्रोन पीएलआई स्कीम के चलते हमारा लक्ष्य है कि भारत में ड्रोन निर्माण करने वाली कंपनियों का टर्नओवर आने वाले तीन वर्षों में 900 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।' वे बोले कि इस समय भारतीय ड्रोन निर्माण कंपनियों का टर्नओवर करीब 80 करोड़ रुपये है।

5 साल में 15,000 करोड़ का होगा ड्रोन उद्योग

5 साल में 15,000 करोड़ का होगा ड्रोन उद्योग

सिंधिया ने कहा कि ड्रोन सेक्टर के पूरे वैल्यू चेन के तीन हिस्से हैं- हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सर्विस डिलेवरी। उनके मुताबिक इन्हीं तीन हिस्सों को जोड़कर पांच साल बाद इस उद्योग का टर्नओवर 1.8 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। सिंधिया ने बताया कि 'इसका मतलब इस उद्योग का टर्नओवर तबतक 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये होगा।' पीएलआई स्कीम के तहत ड्रोन निर्माताओं को ड्रोन और उसके पुर्जे बनाने पर वैल्यू एडिशन का 20% इंसेंटिव अगले तीन वर्षों में मिलेगा। इस योजना के तहत वैल्यू एडिशन का हिसाब ड्रोन और उसके पार्ट की बिक्री से प्राप्त होने वाली सालाना रेवन्यू में से उसे खरीदने में लगने वाली रकम को घटाकर लगाया जाएगा।

एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर भरोसे में सरकार

एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर भरोसे में सरकार

इस बीच एयर इंडिया के विनिवेश के बारे में सिंधिया ने बताया कि 'बोलियां पूरी हो चुकी हैं। जो भी बोलियां आई हैं, सरकार उसके तकनीकी पक्षों का मूल्यांकन कर रही है। हम काफी आशांवित हैं। हम पूरी प्रक्रिया को उसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने की उम्मीद कर रहे हैं।" बता दें कि नेशनल कैरियर के विनिवेश के लिए बोली लगाने वालों में टाटा ग्रुप के अलावा स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह भी अपनी निजी हैसियत से शामिल हैं। क्योंकि, बुधवार यानी 15 सितंबर को एयर इंडिया को खरीदने के लिए फाइनेंशियल बिडिंग का आखिरी दिन था, उसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (डीआईपीएएम) इस प्रक्रिया को अगले स्तर पर ले जा रहा है। डीआईपीएएम ने ट्वीट कर कहा था कि 'ट्रांजैक्शन एडवाइजर ने फाइनेंशियल बिड रिसीव किया है। अब प्रक्रिया निष्कर्ष की ओर बढ़ाई जा रही है।' बता दें कि एयर इंडिया 43,000 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ से दबा हुआ है, जिनमें से 22,000 करोड़ रुपये एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड को भी ट्रांसफर किया जाना है।

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