14 सितंबर से शुरू होगा बुलेट ट्रेन का काम, भारत पर नहीं पड़ेगा खर्च का बोझ
भारत जापान के बीच करार के बाद 14 सितंबर से शुरू होगा बुलेट ट्रेन का काम, भारत की आर्थिक स्थिति पर नहीं पड़ेगा कोई बोझ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे 14 सितंबर को मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन की नींव का उद्घाटन करेंगे। इस प्रोजेक्ट को मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के नाम से जाना जाता है, यह एक दूरगामी प्रोजेक्ट है जिसमें सुरक्षा और रफ्तार पर खास ध्यान दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए भारतीय रेल विश्व स्तर पर रफ्तार और सुविधा और क्षमता के क्षेत्र में अपनी नई पहचान कायम करेगी।

88,000 करोड़ का लोन
इस मेट्रो प्रोजेक्ट को भारत जापान के साथ मिलकर पूरा करेगा, दोनों ही देशों के बीच इस प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ है, जिसके तहत जापान भारत को 88,000 करोड़ रुपए का लोन देगा, यह लोन महज 0.1 फीसदी की ब्याज दर पर दिया जाएगा। इस लोन का रीपेमेंट 15 वर्ष बाद शुरू होगा। भारत सरकार का कहना है कि इतना लंबा समय और कम ब्याज दर एक तरह से इस लोन को ब्याजमुक्त बनाता है।
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80 फीसदी व्यय जापान करेगा वहन
भारत इस प्रोजेक्ट के लिए जो लोन प्राप्त कर रहा है वह तकरबीन शून्य ब्याज के बराबर है, जिसके चलते भारत की मौजूदा वित्तीय व्यवस्था पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं पड़ेगा, इस प्रोजेक्ट के लिए 80 फीसदी से अधिक व्यय का खर्च जापान सरकार उठा रही है। ऐसा इतिहास में पहली बार है जब किसी इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को किसी दूसरे देश ने इतनी ज्यादा सहूलियत के साथ करार किया हो। इस बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट के जिरए मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट का बड़ा मुकाम देने की कोशिश की जाएगी, दोनों सरकारों के बीच जो प्रोजेक्ट साइन किया गया है उसके अनुसार इसे मेक इन इंडिया और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत किया गया है। इसके प्रोजेक्ट के तत चार सब ग्रुप को बनया गया है जिसमे भारतीय उद्योग, जापानी उद्योग, डीआईपीपी, एनएचएसआरसीएल और जेट्रो के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो मेक इन इंडिया के लिए आवश्यक क्षमताओं की पहचान करने में मदद करेंगे।

निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस प्रोजेक्ट से पहले ही भारत और जापान के उद्योगपतियों में सक्रिय बातचीत का दौर पहले ही शुरू हो चुका है, दोनों सरकारों को इस बात का भरोसा है कि आने वाले समय में कई और प्रोजेक्ट को दोनों देश मिलकर पूरा करेंगे, जिससे की मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धि को हासिल किया जा सके। सक्रिय बातचीत का दौर पहले ही शुरू हो चुका है, दोनों सरकारों को इस बात का भरोसा है कि आने वाले समय में कई और प्रोजेक्ट को दोनों देश मिलकर पूरा करेंगे, जिससे की मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धि को हासिल किया जा सके। जापान के साथ शुरू हो रहे इस प्रोजेक्ट के जरिए ना सिर्फ देश में आधुनिक तकनीक आएगी बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार भी हासिल होगा। मेक इन इंडिया का बड़ा उद्देश्य यह भी है कि इस प्रोजेक्ट के तहत अधिक से अधिक पैसा देश में निवेश किया जाए और इसे भारत के भीतर अधिक से अधिक खर्च किया जाए। यही नहीं बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जरिए भारत में निर्माण क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा और नई तकनीक के साथ निवेश में भी बढ़ावा मिलेगा।

मिलेगा रोजगार
माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए 20,000 लोगों को निर्माण के दौरान रोजगार मिलेगा, इन लोगों को विशेष रुप से इस बात की ट्रेनिंग दी जाएगी कि निर्माण के दौरान कैसे काम किया जाए। इसके अलावा हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की भी वडोदरा में स्थापना की जाएगी। इस संस्थान में हर तरह की सुविधा होगी, जोकि जापान के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में होती है। यह संस्थान 2020 के अंत तक बनकर पूरा हो जाएगा और प्रशिक्षण देना शुरू कर देगा।

भारतीयों को किया जाएगा प्रशिक्षित
इस संस्थान में 4000 छात्रों को प्रशिक्षित करने की सुविधा होगी, इन्हें तीन वर्ष के भीतर यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन छात्रों को ट्रेनिंग देने के बाद इन्हें बुलेट ट्रेन के संचालन कार्य में शामिल किया जाएगा। ऐसे में इन प्रशिक्षित युवकों की बदौलत भारत खुद से ही हाई स्पीड ट्रेनों का बेहतर संचालन कर पाएगा और उसे देश के बाहर से प्रशिक्षित लोगों को लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यही नहीं यह प्रशिक्षित लोग भविष्य में और हाई स्पीड ट्रेनों के शुरुआत में अहम कड़ी साबित होंगे। 300 भारतीय रेल के कर्मचारियों को जापान में ट्रेनिंग दी गई है ताकि वह हाई स्पीड ट्रैक टेक्नोलॉजी को बेहतर तरीके से समझ सके। भविष्य को ध्यान में रखते हुए जापान की सरकार ने हर वर्ष 20 सीटों जापान के विश्वविद्यालयों में आरक्षित किया है जहां भारतीय दाखिला ले सके और ट्रेनिंग हासिल कर सके। यहां भारतीय रेल में काम कर रहे कर्मचारी ही दाखिला ले सकते हैं। इस प्रोजेक्ट को भी जापान पूरी तरह से वहन कर रहा है।

आजतक नहीं हुआ कोई हादसा
शिंकनसेन तकनीक को सुरक्षा और भरोसे के लिए जाना जाता है, इस तकनीक को पिछले 50 वर्षों से आजमाया जा रहा है और इसने खुद की विश्वसनीयता को समय के साथ स्थापित किया है। इस तकनीक से चलने वाली ट्रेन कभी भी एक मिनट से अधिक लेट नहीं होती हैं, साथ ही इस तकनीक से चलने वाली ट्रेनों में आजतक एक भी हादसा नहीं हुआ है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट भारत को हाई स्पीड के साथ भरोसेमंद सेवा देगी। इस तकनीक के जरिए भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी निपटा जा सकता है।
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