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बजटः क्या मध्यम वर्ग का सपना ही रह जाएगा 'High speed-Bullet trains' में बैठना!

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बेंगलोर। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही हाई स्पीड ट्रेन और बुलेट ट्रेन चलाने की बात की जा रही है। जो आम एक्सप्रेस ट्रेनों से कहीं ज्यादा रफ्तार से दौड़ेगी। अब तो रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने भी बुलेट ट्रेन की चलाने की बात अपने बजट में भी कह दी है। इसी के साथ बुलेट ट्रेन व हाईस्पीड ट्रेन को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलाने की भी बात कही गई है। दरअसल एफडीआई लाने व प्राइवेट पार्टनरशिप से हाई स्पीड ट्रेन का किराया आम ट्रेनों जैसा होगा। ऐसा नहीं है। बल्कि कहा जा रहा है कि हाई स्पीड ट्रेन का किराया आम एक्सप्रेस ट्रेनों से कई गुना महंगा होगा।

इसमें शायद ही आम मध्यम वर्ग सफर कर पाए। जिससे सवाल उठने लगे हैं कि जिस आम मध्यम वर्ग के मताधिकार से नरेंद्र मोदी ने भाजपा को केंद्र की सत्ता थमाई है। क्या उसी मध्यम वर्ग के लिए हाई स्पीड ट्रेन में बैठना एक सपना होगा। रेल बजट के मुताबिक पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर होगी। इसके लिए ट्रैक का सर्वे शुरू कर दिया गया है। मोदी सरकार बुलेट ट्रेन शुरू तो करने जा रही है लेकिन इसमें आम मध्यम वर्ग का क्या भला होगा, इसका जिक्र तक नहीं किया गया है। बस बड़े-बड़े सपने दिखाए जा रहे हैं।

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इनमें सफर करने से पहले सोचना पड़ता है

देश में शताब्दी व राजधानी ट्रेने सबसे तेज दौड़ती हैं। इनके थर्ड क्लास से लेकर फर्स्ट क्लास तक के किराए इतने महंगे हैं कि कोई आम मध्यम वर्गीय परिवार का इन ट्रेनों सफर करने से पहले सौ बार सोचता है। उदाहरण के तौर पर समझा तो राजधानी में थर्ड क्लास का किराया लगभग दो हजार से चार हजार के बीच है। ट्रेन के महंगे किराए से देश की सत्ता में रही पार्टियां निजात नहीं दिला सकीं हैं। तो यह कैसे कहा जा सकता है कि बुलेट ट्रेन आ जाने के बाद आम मध्यम वर्ग का इस तरह हाई स्पीड ट्रेन में बैठने का सपना कभी साकार हो पाएगा।

ऐसे महंगा होगा बुलेट ट्रेन का किराया

दरअसल नरेंद्र मोदी सरकार को पहले बुलेट ट्रेन लाने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप व एफडीआई से सम्बन्धित नोट केबिनेट के पास भेजना पड़ेगा। जिसके बाद केबिनेट के सदस्यों की मंजूरी के बाद जो निर्णय आएगा उससे भारतीय रेलवे में प्राइवेट कम्पनियां पार्टनर बन जाएंगी। औऱ सरकार का दखल कम हो जाएगा। प्राइवेट कम्पनियां अपनी लागत को देखते हुए या अपनी मनमर्जी से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अव्यवस्थित तरीके से किराया वसूल सकती हैं।

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