Bulldozer Justice: असल में सुप्रीम कोर्ट में हुआ क्या, जजों ने यूपी सरकार की तारीफ क्यों की? सबकुछ जानिए
Bulldozer Justice SC: अपराधियों की संपत्तियों को बुलडोजर से गिराने वाली कुछ राज्यों की कार्रवाई का जहां समाज का एक बड़ा तबका सराहना करता है, वहीं एक ऐसा तबका भी है, जो इसके सख्त खिलाफ है। इसको लेकर राजनीति भी होती है। यूपी सरकार इस मसले पर हमेशा सुर्खियों में रहती है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को ऐसे ही बुलडोजर न्याय के खिलाफ डाली गई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सर्वोच्च अदालत की ओर से इस मामले पर अपना गए रुख से अब इस मसले पर स्थिति काफी स्पष्ट हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने साफ किया है कि मात्र किसी अपराधी की अपराध की वजह से वजह से उनकी प्रॉपर्टी नहीं तोड़ी जा सकती। बार एंड बेंच के मुताबिक अदालत ने कहा, 'क्योंकि (आरोपी) एक अपराधी है, सिर्फ इसलिए तोड़फोड़ कैसे 'की जा सकती है'?'

बुलडोजर जस्टिस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ
अदालत ने उन दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ऐसा कहा है, जिसमें कथित रूप से आरोप है कि तोड़फोड़ बिना नोटिस के 'बदले' की कार्रवाई के तौर पर की गई। ये याचिकाएं राजस्थान के राशिद खान और मध्य प्रदेश के मोहम्मद हुसैन की ओर से दायर की गई थी।
ये दोनों याचिकाएं हरियाणा के नूंह में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा के बाद मुसलमानों के घरों को ध्वस्त करने के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से पहले से दायर याचिकाओं के साथ ही लगाए गए थे।
केवल गैर-कानूनी प्रॉपर्टी ही गिराई जाती है- यूपी सरकार
इस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने बुलडोजर न्याय को लेकर उठाई गई चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि केवल गैर-कानूनी प्रॉपर्टी को ही गिराया जाता है। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक हलफनामा भी दायर किया गया, जिसमें कहा गया कि ध्वस्त करने का कार्य सिर्फ कानून के मुताबिक ही होगा।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा, 'कोई भी अचल संपत्ति सिर्फ इसलिए नहीं गिराई जा सकती, क्योंकि आरोपी आरोपी एक आपराधिक वारदात में शामिल है और विध्वंस सिर्फ तभी हो सकता है, जब निर्माण अवैध है।' इसपर जस्टिस गवई ने जवाब दिया, 'क्योंकि आप इसे स्वीकार कर रहे हैं.....तब हम इसके आधार पर गाइडलाइंस जारी करेंगे।'
बुलडोजर जस्टिस पर यूपी सरकार के स्टैंड की सुप्रीम कोर्ट ने की सराहना
सिर्फ अवैध निर्माण को ही गिराए जाने के यूपी सरकार के स्टैंड की सराहना करते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'हम अखिल भारतीय स्तर पर कुछ गाइडलाइंस निर्धारित करने का प्रस्ताव करते हैं, ताकि उठाई गई चिंताओं का समाधान किया जा सके। हम उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लिए गए स्टैंड की सराहना करते हैं। हमें लगता है कि यह उचित है कि याचिकाकर्ताओं के वकील सुझाव दें, ताकि अदालत ऐसी गाइडलाइंस तैयार कर सके जो अखिल भारतीय आधार पर लागू हों।'
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस में क्या हो सकता है?
जस्टिस विश्वनाथन ने यह भी कहा कि इस तरह की गाइडलाइंस से किसी निर्माण को गिराए जाने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का समाधान मिल सकता है। इस प्रक्रिया में विध्वंस से पहले नोटिस जारी होने, जवाब देने का समय, कानूनी उपचारों के लिए समय शामिल हो सकता है। जज ने सॉलिटिर जनरल को संबोधित अपनी टिप्पणी में कहा, 'आपने जो कहा उचित है। ऐसी गाइडलांइस क्यों पास नहीं की जा सकती?'
किसी भी अवैध निर्माण की रक्षा नहीं करेंगे- सुप्रीम कोर्ट
सॉलिसिटर जनरल ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि अस्थाई निर्माण को भी ऐसी आवश्यकता पड़ने पर गिराया जा सकता है। इसपर जस्टिस गवई ने आश्वसान दिया कि 'हां, हां हम आम सड़कों को बाधित करने वाली किसी भी अवैध निर्माण की रक्षा नहीं करेंगे......इसमें मंदिर भी शामिल होगा।'
किसी के भी आरोपी होने के आधार पर तोड़फोड़ करना सही नहीं-SC
वहीं जस्टिस विश्वनाथ ने यह भी कहा, 'हम व्यापक गाइडलाइंडस की ओर हैं, ताकि कल कोई बुलडोजर न हो और यह दस्तावेजित हो और जांचा जाए ताकि, कोई भी पक्ष किसी भी तरह की कमी की ओर इशारा न कर सके....किसी के भी आरोपी होने के आधार पर तोड़फोड़ करना सही नहीं है....' इसपर मेहता बोले, 'यह कोई तरीका भी नहीं है।'












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