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'करूं तो गलत,न करूं तो गलत,फिर कहेंगे वोट के लिए किया', Budget में चुनावी राज्यों पर क्या बोलीं वित्त मंत्री

Budget 2026 Politics: केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या मोदी सरकार ने चुनावी राज्यों को पर्याप्त तवज्जो दी या नहीं। रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मिनरल जैसे सेक्टर्स पर जोर देने वाले इस बजट में जब राज्यवार ऐलान देखे गए, तो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे चुनावी राज्यों से नाराजगी की आवाजें तेज हो गईं।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि बजट में चुनावी राज्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार ने चुनाव और गैर-चुनावी दोनों तरह के राज्यों के लिए संतुलन बनाकर फैसले किए हैं। वित्त मंत्री ने साफ-साफ कहा कि अगर हम कुछ करते हैं तो भी गलत, कुछ ना करूं तो भी गलत। अगर कर दिया तो कहेंगे वोट के लिए किया है सब।

Budget 2026 Politics

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सफाई में क्या कहा? (Nirmala Sitharaman Statement)

बजट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस निर्मला सीतारमण में जब चुनावी राज्यों को लेकर सवाल पूछा गया, तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा, अगर मैं सिर्फ चुनावी राज्यों के लिए करती, तो आप पूछते कि गैर-चुनावी राज्यों को क्यों छोड़ा। इसलिए हमने दोनों के लिए किया है।

उनका साफ कहना था कि बजट में इतना जरूर है कि सभी चुनावी राज्यों को कवर किया जा सके, बस नाम गिनाकर बोलना सरकार की मजबूरी नहीं हो सकती।

निर्मला सीतारमण ने कहा,

''मुझे लगता है कि इन सभी चुनावी राज्यों को कवर करने के लिए काफी कुछ है। अगर मैं ऐसा करती हूं, तो आप पूछेंगे कि आपने सिर्फ चुनावी राज्यों के लिए ही क्यों किया। अब मैंने इसे चुनावी और गैर-चुनावी दोनों राज्यों के लिए किया है। अगर आप चाहते हैं कि मैं बताऊं कि सिर्फ चुनावी राज्यों के लिए क्या किया जा रहा है, तो मुझे यह बताने में खुशी होगी।''

🔷तमिलनाडु को क्या मिला, क्या छूटा? (Tamil Nadu Budget 2026)

तमिलनाडु उन राज्यों में शामिल है जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। बजट में राज्य का नाम सीधे तौर पर बहुत ज्यादा नहीं आया, लेकिन सरकार ने रेयर अर्थ कॉरिडोर योजना में तमिलनाडु को शामिल किया है। इसके तहत खनन, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा चेन्नई को बेंगलुरु और हैदराबाद से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा भी हुई। नारियल उत्पादन और हाई वैल्यू कृषि योजनाओं से किसानों को फायदा मिलने की बात कही गई।

लेकिन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसे केंद्र का सौतेला व्यवहार बताया। डीएमके सांसद कनिमोझी ने तो यहां तक कहा कि चुनाव के बावजूद तमिलनाडु को कुछ नहीं दिया गया।

🔷बंगाल के हिस्से क्या आया? (West Bengal Budget 2026)

बजट भाषण में पश्चिम बंगाल का नाम भले सीधे न लिया गया हो, लेकिन कागजों में राज्य को कई बड़े प्रोजेक्ट मिले। दानकुनी से सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रस्तावित किया गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।

इसके साथ ही दुर्गापुर को केंद्र बनाकर ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और पूर्वोदय योजना के तहत पर्यटन विकास की बात कही गई है। ई-बसों की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट को दिशाहीन और जनविरोधी बताया। उनका आरोप है कि शिक्षा, सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा मद में कटौती कर दी गई है।

🔷केरल के लिए बजट में क्या? (Kerala Budget 2026)

केरल भी चुनावी राज्य है और यहां उम्मीदें काफी ज्यादा थीं। हालांकि राज्य को रेयर अर्थ कॉरिडोर और टर्टल ट्रेल्स जैसी पर्यटन योजनाओं में शामिल किया गया है, लेकिन हाई-स्पीड रेल और AIIMS जैसे बड़े प्रोजेक्ट से केरल बाहर रहा।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आयुर्वेद की मजबूत परंपरा होने के बावजूद केरल का नाम तक नहीं लिया गया। सत्ताधारी एलडीएफ और विपक्षी यूडीएफ, दोनों ने बजट को राज्य के लिए निराशाजनक बताया।

🔷चुनावी राज्यों को बजट से इतनी उम्मीद क्यों? (Election Budget Strategy)

पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड देखा गया है कि चुनाव से पहले आने वाले बजट में राज्यों को खास पैकेज मिलते हैं। पिछले साल बिहार इसका बड़ा उदाहरण रहा, जहां एयरपोर्ट, मखाना बोर्ड और फूड प्रोसेसिंग संस्थान जैसी घोषणाएं हुई थीं।

इसी वजह से इस बार भी बंगाल, तमिलनाडु और केरल को बड़ी घोषणाओं की उम्मीद थी। लेकिन सरकार का तर्क है कि बजट का मकसद वोट नहीं, बल्कि संतुलित विकास है।

तो क्या बजट राजनीति से ऊपर रहा? (Budget 2026 Political Analysis)

कुल मिलाकर बजट 2026 को लेकर तस्वीर साफ है। सरकार का दावा है कि उसने देश को दीर्घकालीन विकास की दिशा में रखा, जबकि विपक्ष इसे चुनावी राज्यों के साथ भेदभाव बता रहा है। अब फैसला जनता करेगी कि यह बजट विकास का रोडमैप है या सियासी संतुलन साधने की नाकाम कोशिश।

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