राज्‍यसभा का टिकट ना मिलने से नाराज अखिलेश दास ने पार्टी पदों से दिया इस्‍तीफा

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्‍यमंत्री बाबू बनारसी दास के बेटे, बहुजन समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव और एक समय में मायावती के करीबी रहे अखिलेश दास गुप्‍ता ने पार्टी के सभी पदों से इस्‍तीफा दे दिया है। अखिलेश दास ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को त्याग पत्र सौप दिया है और जल्‍द से जल्‍द उसे स्‍वीकार करने का अनुरोध किया है। गोपनीय सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मिली जानकारी के मुताबिक ये सारा घटनाक्रम राज्य सभा की सीट को लेकर हुआ है।

BSP national general secretary Akhilesh Das Gupta resigns

सूत्रों ने जानकारी दी है कि अखिलेश दास गुप्‍ता टिकट के चक्कर में आए थे लेकिन पार्टी ने मना कर दिया। पार्टी वर्तमान में सिर्फ दो प्रत्याशियों को ही जिता सकती है। चर्चा है कि दास लगातार दूसरी बार बसपा से राज्यसभा का टिकट चाहते थे, लेकिन रिक्त हो रहे पदों पर नामांकन शुरू होने के बावजूद बसपा ने प्रत्याशियों के नाम को लेकर अपना रुख साफ नहीं किया है। राज्यसभा सदस्य राजाराम व बृजेश पाठक सहित जिन प्रमुख लोगों को फिर से टिकट देने की अटकलबाजी चल रही है, उनमें दास का नाम शामिल नहीं है। शायद यही वजह रही कि दास का बसपा से मोहभंग हो गया और उन्होंने बसपा की प्राथमिक सदस्यता तथा सभी प्रमुख पदों से इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को भेज दिया।

करोड़ों के घपले में रंगे हैं अखिलेश दास के हाथ

अखिलेश दास गुप्ता का इंडियन मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक गठन से लेकर अब तक विवादों में रहा है। बैंक ने नियम-कानून ताक पर रखकर कई घपले किए, लेकिन ऊंची पहुंच के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। गुप्‍ता ने घपलों की आंच से खुद को बचाने के लिए पहले खुद बैंक के चेयरमैन और बाद में अपनी पत्नी अल्का दास को किनारे कर डमी (रबर स्टैम्प) बोर्ड का गठन कर दिया। मामला संवेदनशील होने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक के बोर्ड को भंग करते हुए प्रशासक तैनात कर दिया है।

इससे यहां जमा सरकारी विभागों के अरबों रुपए डूबने की संभावना है। इंडियन मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक को वर्ष 1989 में बैंकिंग लाइसेंस मिला था। 1989 से लेकर 1997 तक अखिलेश दास बैंक के चेयरमैन रहे। 1998 से लेकर 28 दिसम्बर 2001 तक सांसद अखिलेश दास गुप्ता की पत्नी अल्का दास गुप्ता बैंक की चेयरमैन रहीं। इन दोनों की चेयरमैनशिप के दौरान बैंक में कई बड़ी विभागीय अनियमितताओं का खेल हुआ। वर्ष 2001-02 में सीबीआई सिटी कोऑपरेटिव बैंक, कमल इंफोसिस, साइबर स्पेस और केतन पारिख के घपलों की जांच कर रही थी।

इन घपलों में इंडियन मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक भी शामिल था।

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