सीएम गहलोत की बढ़ी मुश्किलें, BSP ने दी पक्षकार बनाने की अर्जी

जयपुर। राजस्थान में चल रही राजनीतिक उठापटक में एक नया पेंच फंस गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक मदन दिलावर की याचिका में बसपा ने पक्षकार बनाने की मांग की। दिलावर ने बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय के खिलाफ स्पीकर के सामने दायर याचिका पर कार्रवाई नहीं होने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें विधानसभा स्पीकर, सचिव सहित बसपा के छह एमएलए को भी पक्षकार बनाया गया है। इस संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता, आरपी सिंह से कहा कि वे भाजपा द्वारा याचिका के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष से सारी जानकारी लें और दोपहर 2 बजे अदालत को सूचित करें।

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    पार्टी के व्हिप पर बसपा के राजस्थान के प्रमुख भगवान सिंह बाबा ने कहा कि, छह विधायकों ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता था। सीएम अशोक गहलोत ने इन सभी को कांग्रेस में मिला लिया। राजस्थान में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, यह 2008 में भी हुआ था। व्हिप जारी किया गया था क्योंकि विधायकों ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीता था और वे कांग्रेस की गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते थे या उनके लिए वोट नहीं कर सकते थे। बसपा प्रमुख ने काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला किया। हम उसके निर्देश पर काम कर रहे हैं।

    बहुजन समाज पार्टी ने पिछले साल कांग्रेस में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ने वाले छह विधायकों को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी (कांग्रेस) के खिलाफ मतदान करने का रविवार को व्हिप जारी किया है। बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि, सभी छह विधायकों को अलग-अलग नोटिस जारी कर सूचित किया गया कि चूंकि बसपा एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी है और (संविधान की) दसवीं अनुसूची के पैरा चार के तहत पूरे देश में हर जगह समूची पार्टी (बसपा) का विलय हुए बगैर राज्य स्तर पर विलय नहीं हो सकता है।

    नोटिस में आगे कहा गया है कि वे बसपा के व्हिप का पालन करने के लिए आबद्ध हैं और ऐसा नहीं करने पर वे विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो जाने के पात्र होंगे। मिश्रा ने कहा कि बसपा राजस्थान उच्च न्यायालय में अयोग्यता की लंबित याचिका में हस्तक्षेप करेगी या अलग से रिट याचिका दायर करेगी। बता दें कि, 2018 के चुनाव में संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुधा बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने पिछले साल 16 सितंबर को कांग्रेस में एक समूह के रूप में विलय के लिए अर्जी दी थी।

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