पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में महिलाओं के लिए BSF की अनोखी पहल, खुले जिम और स्नान शेड बनाए

सीमा सुरक्षा बल ने पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में महिलाओं और समुदाय की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत-बांग्लादेश सीमा के पास BSF ने तीन खुले जिम और कई टिन शीट से ढके स्नान शेड स्थापित किए हैं। यह पहल केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत की गई है। जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।

32वीं BSF बटालियन ने नादिया जिले के गेडे, कादीपुर और तुंगी गांवों में जिम स्थापित किए हैं। इन जिमों में महिलाओं के लिए समानांतर बार, कमर स्ट्रेचर, और चेस्ट प्रेस जैसे उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। BSF ने यह सुनिश्चित किया है कि ये जिम पूरे दिन के दौरान सभी उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध रहें। जिससे स्थानीय लोग अपनी सेहत पर ध्यान दे सकें।

BSF

जिम के साथ-साथ BSF ने महिलाओं के लिए टिन शीट से ढके स्नान शेड का निर्माण किया है। पहले इन क्षेत्रों की महिलाएं सड़क किनारे खुले में नहाने को मजबूर थी। लेकिन अब नारी सम्मान स्नानघर के रूप में स्थापित इन शेडों ने उनकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। इन शेडों का उद्घाटन स्थानीय महिलाओं द्वारा किया गया और यह पहल समुदाय में बेहद सराही गई है।

स्थानीय ग्रामीणों ने BSF के इस कदम की सराहना की है। गेडे गांव के निवासी कुमार विश्वास ने कहा कि यह कदम महिलाओं की गरिमा और सम्मान को बढ़ाने वाला है। उन्होंने BSF की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों और BSF के बीच सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। जो सीमा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।

BSF के कमांडिंग ऑफिसर सुजीत कुमार ने बताया कि ये परियोजनाएं BSF द्वारा आंतरिक रूप से वित्त पोषित थी। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा कर्तव्यों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का समर्थन करना भी हमारी जिम्मेदारी है। BSF की इस पहल को समुदाय ने गर्मजोशी से अपनाया है और इसे सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय लोगों के बीच मजबूत संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

BSF का नवाचार का दृष्टिकोण केवल इन हालिया परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। पिछले नवंबर में BSF ने सीमा पर मधुमक्खी के छत्ते लगाने की अनोखी पहल की थी। जो उनकी रचनात्मक सोच और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी BSF की इन पहलों को ध्यान में लिया है और इनके सामाजिक प्रभाव की सराहना की है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के महत्व को दोहराते हुए कहा कि सीमावर्ती गांवों को केवल दूरस्थ चौकियों के रूप में नहीं। बल्कि भारत की पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। BSF की इन पहलों ने इस दृष्टिकोण को मजबूती से पेश किया है और स्थानीय समुदायों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ किया है।

BSF की ये पहलें न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। बल्कि वहां के निवासियों के जीवन स्तर को भी सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक जुड़ाव के इस प्रयास से BSF ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को और भी प्रभावशाली ढंग से निभाया है।

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