किस राज्य में कितने प्रतिशत ब्राह्मण? क्या है इनका इतिहास? जानें यहां सबकुछ
Brahman kaha se aaye: देश में ब्राह्मण जाति को लेकर सियासत तेज हो गई है। कोई रूस का बता रहा तो कोई इंडोनेशिया का बता रहा है। चलिए ऐसे में आज हम आपलोगों ब्राह्मण जाति से जुड़े रोचक तथ्य बताने जा रहे।

Brahmin Caste: आजकल ब्राह्मण जाति को लेकर बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं। कई नेता राजनीति में भी इस समाज का नाम घसीटते हैं। कोई इन्हें विदेशी मूल का बताता है तो कोई रूस या इंग्लैंड का कहता है। लेकिन आज हम जो आपलोगों को बताने जा रहे हैं वह ब्राह्मण के बारे में कुछ सटीक जानकारी है। तो चलिए जानते हैं क्या है ब्राह्मण जाति का इतिहास? इनकी प्राचीन काल में क्या थे इनके काम?
सबसे पहले ब्राह्मण का इतिहास
ब्राह्मण जाति का इतिहास प्राचीन भारत से भी पुराना माना जाता है, ब्राह्मण जाति की कहानी वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं। वास्तव में ब्राह्मण कोई जाति विशेष ना होकर एक वर्ण है। ब्राह्मण व्यवहार का मुख्य स्रोत वेद हैं। ब्राह्मणों (Brahmin) के सभी सम्प्रदाय वेदों से प्रेरणा लेते हैं। ब्राह्मणों का भारत की आज़ादी में भी बहुत योगदान रहा है जिसकी इतिहास में चर्चा है। ब्राह्मणों के सभी सम्प्रदाय वेदों से प्रेरणा लेते हैं।
ब्राह्मण कहां से आए ( brahman kaha se aaye)
दरअसल, कई लोग ब्राह्मण के बारे में दावा करते हैं कि ब्राह्मण किसी दूसरे देश से आए हैं। लेकिन इसका प्रमाण किसी के पास नहीं है। कई बार ब्राह्मणों को राजनीतिक हथियार के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इतिहासकारों की माने तो ब्राह्मण भारत के ही मूल निवासी हैं। क्योंकि वेद में ब्राह्मण जाति का जिक्र किया है।
किस राज्य में ब्राह्मण की कितनी आबादी
उत्तराखंड में ब्राह्मण =25%,
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण =20 %
हिमाचल प्रदेश में ब्राह्मण=18%
राजस्थान में ब्राह्मण=15.5%
दिल्ली में ब्राह्मण=15%
जम्मू कश्मीर में ब्राह्मण=12%
हरियाणा में ब्राह्मण=10%,
पंजाब में ब्राह्मण=7%,
झारखंड में ब्राह्मण= 5%,
देश में लगभग=10% पांचाल ब्राह्मण
बिहार में ब्राह्मण जाति का कोड
बिहार में ब्राह्मण का जाति कोड 128 है वहीं कायस्थ का कोड 22 जबकि राजपूत के लिए 171 तो भूमिहार के लिए 144 है। कुर्मी जाति का अंक 25 और कुशवाहा का 27 है।
ब्राह्मण (Brahamin Types Category) के प्रकार
स्मृति-पुराणों में ब्राह्मण के 8 भेदों का वर्णन मिलता है:- मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि। ब्राह्मणों के सरनेम और विधि-विधान में अंतर दिखता है।












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