'ये तो हमारा खेल भी नहीं'... बॉम्बे HC ने याचिका पर कहा- क्रिकेट किट ले सकते तो पानी बोतल भी खरीद सकते
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान अलग ढंग से ही जवाब दिया। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रिकेट किट खरीद सकते हैं तो वे उनके लिए वाटर बोटल भी खरीद सकते हैं।
मुंबई, 21 जुलाई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान अलग ढंग से ही जवाब दिया। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रिकेट किट खरीद सकते हैं तो वे उनके लिए वाटर बोटल भी खरीद सकते हैं।

ग्राउंड में सुविधाएं की कमी
मुख्य न्यायाधीश दिपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच याचिका की सुनवाई कर रही थी। याचिका दायर कर बताया कि महाराष्ट्र के क्रिकेट ग्राउंड में मूलभूत सुविधाएं की भारी कमी है। यहां तक कि ग्राउंड में टॉयलेट और पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है।

क्रिकेट हमारा खेल नहीं
इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जो माता-पिता अपने बच्चों के लिए क्रिकेट किट खरीद सकते हैं वो पानी की बोतल भी खरीद सकते हैं। साथ ही कहा कि क्रिकेट वो खेल भी नहीं जो मूलरूप से भारत से आया है।

याचिका दायर कर मांगा जवाब
एक वकील राहुल तिवारी ने जनहित याचिका दायर कर दावा किया कि मुंबई क्रिकेट संघ द्वारा प्रबंधित राज्य के कई क्रिकेट मैदानों में नये और पेशेवर क्रिकेटरों के खेलने के बावजूद पीने के पानी और शौचालय की बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।

पानी की आपूर्ति नहीं होती
पीठ ने नोट करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के कई जिलों में आज तक हर रोज पोर्टेबल पानी की आपूर्ति नहीं होती है। क्या आप जानते हैं कि औरंगाबाद को सप्ताह में एक बार पोर्टेबल पानी मिलता है।

मूल रूप से भारत का नहीं
मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि क्रिकेटरों को अपना पानी क्यों नहीं मिल सकता? आप क्रिकेट खेलना चाहते हैं जो हमारा खेल भी नहीं है... यह मूल रूप से भारत का नहीं है।
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