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दिलीप कुमार ने जब 1993 के दंगों में लोगों को दी थी अपने घर में शरण, बने थे शांति दूत

मुंबई, 7 जुलाई। हिंदी सिनेमा के दिग्‍गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार की सुबह हिंदुजा अस्पताल में निधन हो गया। 98 वर्षीय दिलीप कुमार की मौत के साथ हिंदी सिनेमा एक पीढ़ी का अंत माना जा रहा है। दिलीप कुमार ने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनकी अदाकारी आने वाली कई पीढि़यों तक याद की जाएगी। पेशावर में पैदा हुए यूसुफ सरवर खान जो हिंदी सिनेमा में दिलीप कुमार के नाम से सितारा बन कर जगमगाए उनकी दरियादिली के तमाम किस्‍से लोगों के जेहन में उनके जाने के बाद ताजा हो गए हैं।

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    दिलीप कुमार ने फिल्मों में एंग्री मैन से लेकर प्रेमी का किरदार पर्दे पर निभाए, उनकी अदाकारी ने एक प्रतिमान स्‍थापित किया। 1950 और 60 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज करने वाले अभिनेताओं की तिकड़ी के अंतिम दिलीप कुमार का तो अंत हो गया लेकिन वो अपनी फिल्‍मों के जरिए हमारे बीच सदा जीवित रहेंगे। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों से अपने करियर की शुरूआत करने वाले दिलीप कुमार रंगीन सिनेमा तक का सफर तय किया। दिलीप कुमार फिल्‍मी दुनिया के विकास के गवाह रहे उन्‍होंने सिर्फ बॉलीवुड को बदलते ही नहीं देखा बल्कि भारत और दुनिया के हर बदलाव को देखा।

    1990 का वो दौर था जब मायानगरी मुंबई में सांप्रदायिक तनाव चरम था उस समय दिलीप कुमार एक शांति दूत बन कर लोगों की मदद की। मुंबई में 1993 के हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान उन्‍हें शांति स्‍थापित करने के लिए जो प्रयास किए उनको आज भी याद किया जाता है। ये दिलीप कुमार ही थे जिन्‍होंने लोगों के रहने के लिए अपने घर दरवाजा खोल दिया था। उन्‍होंने अपने घर में ही दंगा प्रभावित लोगों के राहत कार्य के लिए एक कमांड सेंटर बनाया था।

    1966 में, दिलीप कुमार ने अभिनेत्री सायरा बानो से शादी की, जो उनसे 22 साल छोटी थीं। बाद में उन्होंने हैदराबाद की सोशलाइट अस्मा साहिबा से शादी कर ली, उन्हें 1981 में दूसरी पत्नी बनी लेकिन दूसरी शादी का जनवरी 1983 में अंत हो गया। दिलीप कुमार को आठ भाषाओं का ज्ञान था। उनके कुरान ही नहीं गीता भी याद थी। दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा "द सबस्टेंस एंड द शैडो" की प्रस्तावना में लिखा, "उनकी धर्मनिरपेक्ष मान्यताएं सीधे उनके दिल से और सभी धर्मों, जातियों, समुदायों और पंथों के प्रति उनके सम्मान से निकलती हैं।"

    बता दें दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के सर्वाधिक सम्‍मानित कलाकारों में से एक हैं। दिलीप कुमार को 1991 में पद्म भूषण और 2015 में पद्म विभूषण से सम्‍मानित किया गया था। वहीं 1994 में दादासाहेब फाल्के सम्‍मान से भी उन्‍हें सम्‍मानित किया गया था। वही राज्यसभा के नामांकित सदस्य भी थे।1998 में दिलीप कुमार को पाकिस्तान सरकार के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार निशान-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया था।

    दिलीप कुमार के बारे में एक महत्‍वपूर्ण केस बहुत पॉपुलर है, 1998 में पाकिस्‍तान सरकार ने दिलीप कुमार को सर्वोच्‍च्‍च सम्‍मान से सम्‍मानित किया और उसी की कुछ समय बाद पाकिस्‍तान और भारत के बीच कारगिल युद्ध शुरू हो गया। उस समय शिवसेना संस्‍थापक बाल ठाकरे ने दिलीप कुमार को पुरस्कार वापस करने की मांग उठाई लेकिन दिलीप कुमार ने सम्‍मान वापस करने से इंकार कर दिया। उन्‍होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से इस मामले में मुलाकात की थी।

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