केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिया जवाब, कहा पॉर्न वेबसाइट बंद हुई तो साहित्य को होगा नुकसान
नई
दिल्ली। पॉर्न वेबसाइट को बंद करने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए कहा है कि यदि भारत में पॉर्न वेबसाइट बंद हुई तो सबसे बड़ा नुकसान देया के साहित्य और साहित्यकारों को पहुंचेगा। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि अश्लील वेबसाइट को बंद करना आसान नहीं है। सरकार का ऐसा मानना है कि यदि अश्लील वेबसाइट बंद हुई तो जिस साहित्य में ऐसे शब्द होंगे वे इंटरनेट पर नहीं उपलब्ध हो पाएंगे। id="toptextpromo">न्यायमूर्ति
बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केवी विश्वनाथन ने कहा, इस तरह की सभी वेबसाइटों पर रोक लगाना भारी नुकसान का कारण होगा। इससे अच्छे साहित्य भी ब्लॉक हो जाएंगे और यह बड़े नुकसान का कारण होगा। ऐसी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए हर कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेयर लगाना होगा। सभी कंप्यूटर निर्माताओं को इसके लिए निर्देश देना होगा। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>सुप्रीम
कोर्ट इंदौर निवासी वकील कमलेश वासवानी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई कर रही थी। इस मामले में दायर की गई याचिका पर में कहा गया था कि अश्लील वीडियो देखना अपराध नहीं लेकिन अश्लील साइट्स पर पाबंदी लगाना चाहिए क्योंकि महिलाओं, लड़कियों व बच्चों के खिलाफ जो अपराध होते हैं उनमें पोर्नोग्राफी की भूमिका उत्प्रेरक की होती है। वासवानी ने यह भी कहा था कि 20 करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो, क्लिपिंग बाजार में उपलब्ध हैं जो इंटरनेट से डाउनलोड या वीडियो सीडी में कॉपी किए जा सकते है। सेक्स से जुड़ी सामग्री जिन्हें बच्चे भी देखते हैं हिंसक, क्रूर, पथभ्रष्ट करने वाले हैं। ये देश की सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बन गए हैं। कोर्ट ने गत वर्ष 18 नवंबर को दूरसंचार विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था कि देश में विशेष रूप से बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री वाली वेबसाइट्स पर किस तरह रोक लगाई जाए।











Click it and Unblock the Notifications