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स्विस राजदूत बोले- Black Money India के लिए अब कोई मुद्दा नहीं, PM मोदी का जिक्र कर पसंद भी बताई

काला धन भारत में ज्वलंत मुद्दा रहा है। हालांकि, एक चौंकाने वाले बयान में स्विस राजदूत डॉ राल्फ हेकनर ने कहा, स्विट्जरलैंड और भारत के बीच वित्तीय संबंधों में अब काला धन कोई मुद्दा नहीं है।

Black Money India

Black Money India के लिए अब कोई मुद्दा नहीं है। इसका कारण बताते हुए स्विस राजदूत Dr Ralf Heckner ने कहा कि दोनों पक्षों ने पहले ही सूचनाओं के कई बैचों का आदान-प्रदान किया है। ऐसे में काला धन भारत के लिए कोई मुद्दा नहीं रह गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ इंटरव्यू में राजदूत राल्फ हेकनर ने बताया कि वह दो साल से अधिक समय से स्विस राजदूत हैं लेकिन उन्होंने काले धन के बारे में शायद ही कुछ सुना है। पीएम मोदी का जिक्र कर उन्होंने कहा, sustainability यानी निरंतरता उन्हें बहुत पसंद है।

भारत और स्विटजरलैंड के रिश्ते

उन्होंने कहा कि स्विट्ज़रलैंड और भारत के बीच बैंक से जुड़ी सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान से जुड़ी द्विपक्षीय संधि के तहत काले धन के मुद्दे को निपटाया गया है। बता दें कि स्विट्जरलैंड और भारत के बीच 2018 में ये करार हुआ था। गत चार साल में सूचनाओं के आदान-प्रदान का जिक्र कर राजदूत ने कहा- हमारे पास स्विट्जरलैंड और भारत के बीच सूचनाओं का कई बार आदान-प्रदान हुआ है। इसलिए काले धन का मुद्दा अब नहीं है। वित्तीय संबंधों से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों पर किसी प्रकार के बादल नहीं मंडरा रहे हैं।

काला धन मुद्दा क्यों नहीं रहा ?

दरअसल, परंपरागत रूप से, भारतीय व्यापारियों, राजनेताओं और उद्योगपतियों के लिए स्विट्जरलैंड को एक सुरक्षित टैक्स हैवन के रूप में देखा जाता था। अब कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि स्विस बैंकिंग प्रणाली में भारतीय निवेश में 2021 में तेज वृद्धि देखी गई है। हालांकि, राजदूत का कहना है कि स्विट्जरलैंड 2018 में बैंक सूचना समझौते के स्वचालित आदान-प्रदान पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से चार बैचों में भारतीय खाताधारकों के बारे में जानकारी शेयर कर चुका है, ऐसे में दोनों देशों के बीच Black Money कोई मुद्दा नहीं रहा।

प्रधानमंत्री मोदी को क्या पसंद है ?

स्विस राजदूत ने कहा, "मैं अब एक ओर झुकाव देखता हूं क्योंकि माननीय प्रधानमंत्री को sustainability यानी निरंतरता बहुत प्रिय है और यह स्विस सरकार पर भी लागू होती है। हमारी सरकार स्विट्जरलैंड के वित्तीय केंद्र के लिए एक रणनीति लेकर आई थी। स्विस सरकार ऐसा बदलाव देखना चाहती है, जिससे स्थिरता पाई जा सके।" उन्होंने कहा, हम जलवायु शमन या जलवायु अनुकूलन में 100 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश करने की बात नहीं कर रहे हैं, हम स्विस बैंकिंग फंड, बीमा और बैंकों द्वारा प्रबंधित किए जा रहे खरबों अमेरिकी डॉलर के बारे में बात कर रहे हैं। स्विस सरकार के अनुसार निवेश स्थायी तरीके से किया जाना चाहिए।"

बिजनेस के लिए पैसे और स्थायी समाधान

उन्होंने स्थायी वित्तीय मॉडल में भारतीय निवेशकों के लिए अवसरों के बारे में भी विस्तार से बताया। भारत के लिए इसका क्या मतलब है ? इस सवाल पर राजदूत Dr Ralf Heckner ने कहा, "उदाहरण के लिए, यदि आप एक स्थायी भारतीय कंपनी हैं, तो आप वह कंपनी हो सकते हैं जिसमें स्विस केंद्र निवेश करना चाहेगा। आप एक भारतीय फिन-टेक (वित्तीय तकनीक) कंपनी हैं और आपके पास टिकाऊ कंपनियों के डेटा के साथ स्थायी व्यापार मॉडल भी है। ऐसा होने पर आप स्विट्जरलैंड में बैंकों के बीमा और पेंशन फंड के लिए पसंदीदा कंपनी हो सकते हैं, ताकि स्थायी व्यापार समाधान के लिए धन प्रवाह को निर्देशित किया जा सके।"

स्विटजरलैंड ने 101 देशों को भेजी अकाउंड डिटेल

एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया, स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन की एक विज्ञप्ति के अनुसार, 2021 में 101 देशों के साथ वित्तीय खातों की जानकारी का आदान-प्रदान किया गया। आदान-प्रदान सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान (AEOI) पर वैश्विक मानक के ढांचे के भीतर हुआ। स्विट्जरलैंड का कहना है कि वह टैक्स के मामलों में सूचना के अंतरराष्ट्रीय स्वचालित आदान-प्रदान के लिए वैश्विक मानक अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Swiss Bank कौन सी सूचनाएं शेयर करते हैं

स्विट्जरलैंड में AEOI के कार्यान्वयन के लिए कानूनी आधार 1 जनवरी, 2017 को लागू हुआ। इसके तहत पहचान, खाता और वित्तीय जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है। इसमें नाम, पता, निवास का देश और कर पहचान संख्या के साथ ही खाताधारक किस वित्तीय संस्थान में रिपोर्टिंग करते हैं, अकाउंट बैलेंस और पूंजीगत आय से संबंधित जानकारी भी शामिल होती है।

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    पारदर्शिता का सवाल और AEOI

    आदान-प्रदान के दौरान शेयर की गई जानकारी कैंटोनल कर अधिकारियों को यह सत्यापित करने की अनुमति देती है कि करदाताओं ने अपने टैक्स रिटर्न में विदेशों में अपने वित्तीय खातों को सही ढंग से घोषित किया है या नहीं। ओईसीडी का ग्लोबल फोरम ऑन ट्रांसपेरेंसी एंड एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन फॉर टैक्स परपज (ग्लोबल फोरम) AEOI के कार्यान्वयन की समीक्षा करता है।

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