मोदी के कारण टूट रहा है संघ और भाजपा का रिश्ता!

कांग्रेस जहां अपनी कम संख्या के कारण संसद में कमजोर विपक्ष की भूमिका में रही है तो वहीं संघ सरकार के फैसलों को प्रभावित करने में आगे आता जा रहा है। सरकारी नीतियों में दखल के मामले में विपक्षी पार्टियां पीछे छूट गई हैं तो वहीं भाजपा की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पार्टी की वैचारिक सलाहकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय किसान संघ ने ये मोर्चा संभाल लिया है। कई बार सरकार के फौसले को चुनौत देकर संघ ने अपना विरोधी रवैया दिखाया है।
फिर चाहे जीएम फसलों का खेतों में परीक्षण का मामला हो या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय में चार साल के कोर्स का। संघ ने सरकार के फैस लों का विरोध किया है। हाल ही में यूपीएससी ऐप्टीट्यूट टेस्ट के मामले में संघ परिवार के भीतर ही विरोध के स्वर उभरे हैं। वहीं, राज्यसभा में सरकार को गजा में इस्राइल की बमबारी पर अपने रुख और अब इंश्योरेंस बिल पर औपचारिक विपक्ष की नाराजगी झेलनी पड़ी है।
हलांकि कई राजनीतिक जानकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और इसके सहयोगियों को सरकार के विरोध के तौर पर नहीं देखते। उनका मामनना है कि महज कुछ मामलों में दखल को सरकार के विरोध की तरह नहीं लिया जाना चाहिए। लोगों को ये भी याद रख ना चाहिए कि भाजपा के चुनाव जीतने में आरएसएस ने बहुत मेहनत की है। जानकार जहां कांग्रेस को गवर्नेंस की क्लासिक पार्टी की संज्ञा देती हैं, जिसके पास बड़े पैमाने पर संगठन स्तर पर मजबूती नहीं है। वहीं, आरएसएस, बीजेपी को यह मजबूती देती है।












Click it and Unblock the Notifications