पहले जैसी नहीं लोकसभा में इस बार BJP की ताकत, कई मामलों में करना पड़ेगा समझौता
इस लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के आंकड़े से 32 सीट दूर रह गई और 240 सीटों पर ही रुक गई। जबकि एनडीए के खाते में 292 सीटें आई हैं।
जबकि विपक्ष इस बार मजबूत हुआ है और इंडिया गठबंधन को 234 सीटों पर जीत मिली है। लिहाजा इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सदन में अहम बिलों को पास करने या फिर संविधान संशोधन करना आसान नहीं होगा।

जिस तरह के नतीजे इस चुनाव में देखने को मिले हैं उसके परिणाम संसद में भी स्पष्ट तौर पर देखने को मिलेगा। पिछली बार की तुलना में इस बार भाजपा को लोकसभा में 20 फीसदी कम समय मिलेगा।
स्टैंडिंग कमेटी में घटेगी साझेदारी
इसके साथ ही संसद की अलग-अलग कमेटियों में भी भाजपा का प्रतिनिधित्व कम होगा, स्टैंडिंग कमेटी और सेलेक्ट कमेटी में भी भाजपा की भागीदारी घटेगी। इस बार विपक्ष को इन कमेटियों में बेहतर जगह मिलेगी।
सदन में समय भी मिलेगा कम
लोकसभा में अलग-अलग दलों को बोलने का समय उनके सांसदों की संख्या के आधार पर मिलता है। इंडिया गठबंधन के पास 234 सदस्य हैं, लिहाजा अगर किसी मुद्दे पर एक घंटे की बहस होती है तो विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक को 26 मिनट का समय मिलेगा।
बिना बहस नहीं पास सकेंगे बिल
वहीं बिना पर्याप्त बहस और चर्चा के सदन में किसी बिल को पास कराना आसान नहीं होगा। इसके साथ ही मनी बिल के जरिए किसी अध्यादेश को बिना राज्यसभा में पास कराए जल्द कानून का रूप देना भी मुश्किल होगा क्योंकि भाजपा को अपने सहयोगी दलों की सहमति लेनी जरूरी होगी।
जरूरत पड़ेगी दो तिहाई समर्थन की
वहीं ऐसे बिल जिनके लिए संविधान संशोधन की जरूरत होती है उसे पास करने की आर्टिकल 368 के तहत दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। लेकिन इस समय एनडीए पास 293 सांसद हैं। लिहाजा 70 अन्य सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। एक देश, एक चुनाव, यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे बिल को पास कराना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।












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