NDA के सहयोगी दलों को एकजुट करने में जुटी है बीजेपी, I.N.D.I.A. से फर्क क्या है? जानिए

2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी जिस तरह से एनडीए के सहयोगी दलों को इस समय एकसाथ लेकर चलने की कोशिश में दिख रही है, वह पिछले दशक में पहली बार नजर आ रहा है। इसी के तहत शुक्रवार को पार्लियामेंट एनेक्सी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का एक मीडिया वर्कशॉप भी आयोजित किया है।

दरअसल, बीजेपी मीडिया सेल इस वर्कशॉप के माध्यम से एनडीए के सभी सहयोगी दलों के प्रवक्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित करवा रही है। लक्ष्य यही है कि मोदी सरकार के विकास कार्यों और नीतियों से जुड़े मुद्दों पर मीडिया के सामने उनके विचारों में तालमेल बनी रहे।

bjp and nda allies

पीएम मोदी एनडीए सांसदों के साथ कर चुके हैं 11 बैठक
पिछले महीने की 18 जुलाई को जब से दिल्ली में एनडीए के सहयोगी दलों की बैठक हुई है, बीजेपी अपने पार्टनरों को लेकर बहुत ही सजग है। उसकी कोशिश रही है कि एनडीए के सहयोगी दलों की एकजुटता प्रदर्शित होती रहे। इसकी पहल खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर से हुई है। वे 31 जुलाई से लेकर 9 अगस्त के बीच एनडीए सांसदों के अलग-अलग ग्रुप के साथ 11 बैठकें कर चुके हैं।

सहयोगियों को पूर्ण सम्मान का संदेश दे रही है बीजेपी
इन सभी बैठकों में पीएम मोदी ने एकता की ताकत की बात की और यह संदेश देना चाहा कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों का पूरा ख्याल रखती है। राज्य स्तर पर भी उन्हें भरपूर सम्मान देकर अगुवाई करने का मौका देती है। इसके लिए उन्होंने बिहार, पंजाब और मौजूदा समय में महाराष्ट्र का भी उदाहरण दिया, जहां सबसे बड़ी पार्टी के बावजूद भाजपा ने सहयोगी दलों को गठबंधन का नेतृत्व करने का अवसर दे रखा है।

सरकार के काम को लोगों तक पहुंचाने में तालमेल बिठाने की कोशिश
पीएम मोदी सहयोगी दलों के सांसदों से यह भी कह चुके हैं कि अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में जाएं और 9 वर्षों में उनके कार्यकाल में जो विकास के काम हुए हैं, जो कल्याणकारी योजनाएं शुरू हुई हैं, उसके बारे में लोगों से बात करें। एनडीए की सहयोगी पार्टियों के प्रवक्ताओं की वर्कशॉप का भी मकसद यही है कि पीएम मोदी के संदेश के अनुसार सरकार की सफलताएं वोटरों तक पहुंचाएं।

गुरुवार को जिस तरह से लोकसभा में पीएम मोदी ने मणिपुर पर विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब दिया है, उससे बीजेपी के साथ-साथ उसके सहयोगी दलों के भी हौसले बुलंद हैं। क्योंकि, प्रधानमंत्री ने एक तरह से 2024 के लोकसभा चुनाव का टोन सेट कर दिया है और विपक्ष अपने ही बिछाए जाल में उलझा हुआ नजर आया है।

पुराने सहयोगियों के आरोपों को मिटाने की भी कोशिश
बीजेपी पर हाल के समय में उसके कुछ पुराने सहयोगियो ने यही आरोप लगाने शुरू किए थे कि मोदी-शाह के युग में एनडीए पर एक दल का प्रभुत्व हावी हो गया है। भाजपा इस नरेटिव को बदलने में पूरी तरह से जुटी हुई लग रही है। लेकिन, अगर एनडीए से मुकाबले के लिए बने इंडिया गठबंधन की बात करें तो फिलहाल इस फ्रंट पर वह पिछड़ता दिख रहा है।

I.N.D.I.A. में फर्क क्या है?
इंडिया गठबंधन में अब 26 दल शामिल हो चुके हैं। पटना और बेंगलुरू में इसकी दो विशाल बैठकें भी हो चुकी हैं। लेकिन, अभी तक इनके घटक दलों में से भी कोई दावे के साथ कहने के लिए तैयार नहीं है कि पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक में यह लोकसभा चुनावों में पूरी एकजुटता दिखा पाएंगे।

क्योंकि, बंगाल में सीपीएम और कांग्रेस की टीएमसी से नहीं बनी रही है तो पंजाब, दिल्ली और गुजरात में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तालमेल का अभाव दिख रहा है। वहीं केरल में जहां सीपीएम की अगुवाई वाला गठबंधन सरकार में है तो मुख्य विपक्षी गठबंधन की अगुवाई कांग्रेस कर रही है; और वहां भी गठबंधन को लेकर कई विरोधाभास हैं। इसी तरह से उत्तर प्रदेश में भी अभी तक समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की क्या सूरत होगी, ये तस्वीर नहीं साफ हुई है।

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