कांग्रेस समेत कई दलों में तोड़फोड़ करने की तैयारी में अमित शाह
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उस कंपनी के सीईओ की तरह काम करते हैं, जिसके लिये लक्ष्य को पूरा करना ही एक मात्र मकसद होता है। इस मकसद को पूरा करने के लिये विरोधियों को कमजोर करना भी जरूरी होता है। और अब यही काम भाजपा कई राज्यों में करने जा रही है।

अब भाजपा राज्यों में सहयोगी दलों के साथ अपनी आगे की यात्रा को बढ़ाने से ज्यादा दूसरे दलों के असरदार और प्रभाव शाली नेताओं तो तोड़ेगी। उन्हें अपने साथ लाने के लिए लालच देगी पद का। बीते लोकसभा चुनाव के दौरान उसने इस रणनीति को अपनाया और अब उस पर अखिल भारतीय स्तर पर काम शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान हरिय़ाणा में राव इंद्रजीत सिंह और चौधरी बीरेन्द्र सिंह को हरिय़ाणा में कांग्रेस से तोड़कर भाजपा के साथ जोड़ा गया। अब इन्हें मंत्री पद भी दे दिया गया है। हरियाणा में लोकसभा और विधान सभा चुनावों के दौरान इनकी अहम भूमिका रही थी।
इस रणनीति पर गंभीरता से काम कर रहे हैं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में राम कृपाल सिंह तो लालू प्रसाद यादव की पार्टी से निकाल कर भाजपा से जोड़ा। उन्हें पार्टी का टिकट दिया। यादव को भी हालिया मोदी सरकार के विस्तार में शामिल कर लिया गया है।
इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेँस के नेता अजातशत्रु सिंह भी भाजपा से जुड़ गए हैं। वे कर्ण सिंह के पुत्र हैं। उन्हें जम्मू में असरदार माना जाता है।
भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि राज्यों में सहयोगियों के साथ वे बहुत लंबी दूर नहीं जा सकते। पहले पंजाब में अकाली दल के साथ कुछ खटपट हुई और अब महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ विवाद चल रहा है। जानकारों मानते हैं कि भाजपा को समझ आ गया है कि विभिन्न दलों के उन नेताओं को अपने साथ जोड़ा जा सकता है,जिनका अच्छा असर अपने इलाकों में है और जो अपने दल में घुटन महसूस कर रहे हैं।












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