भाजपा ने 2019 में लोकसभा के साथ 11 राज्यों में चुनाव कराने की बात को नकारा
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 2019 में लोकसभा के साथ 11 राज्यों में भी चुनाव कराने की बात को खारिज किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा कि भाजपा इसके पक्ष में नहीं है और मीडिया में इसको लेकर आ रही रिपोर्ट ठीक नहीं हैं। पात्रा ने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर अमित शाह ने अपनी चिट्ठी में कहीं ऐसी बात नहीं कही है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक ने अपनी बात कही है। इस पर अगर सभी बैठकर एकमत पर पहुंचते हैं तो ही इस ओर सोचा जा सकता है।

11 राज्यों में साथ चुनाव पर भाजपा की सफाई
बता दें कि इस तरह की खबरें मीडिया में आई हैं, जिनमें कहा गया कि अगले साल लोकसभा चुनावों के साथ 11 राज्य के चुनाव कराने का प्रयास किया जा सकता है। लोकसभा चुनावों के साथ 11 राज्यों के चुनाव कराने पर भाजपा शासित तीन राज्यों का चुनाव निलंबित किया जा सकता है और 2019 में बाद में होने वाले कुछ राज्यों के चुनाव पहले कराए जा सकते हैं। भाजपा की ओर से अब इस पर सफाई दी गई है।
संबित पात्रा ने ये भी कहा कि राहुल गांधी जी ने हैदराबाद में एडिटर्स के साथ अपने मन के विषय को बांटते हुए कहा है कि मुझे किसी प्रकार के हिंदुत्व में विश्वास नहीं है। मैं राहुल जी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप ऐसे शब्दों का उच्चारण किसी और धर्म या सम्प्रदाय विशेष के लिए कर सकते है।

आमित शाह ने लिखी है लॉ कमीशन को चिट्ठी
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखकर देश में एक साथ चुनाव कराए जाने का समर्थन किया है। शाह ने लॉ कमीशन को पत्र लिखकर कहा कि देश में कहीं न कहीं चुनाव होते ही रहते हैं जिसके कारण केंद्र और राज्य सरकारों के विकास कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं, बार-बार चुनाव कराने के कारण काफी पैसा भी खर्च होता है। पूरा सिस्टम इसी में व्यस्त हो जाता है। लिहाजा वो देश में एक साथ चुनाव कराने के समर्थन में हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात कह चुके हैं।

चुनाव आयुक्त ने कहा, एक साथ चुनाव संभव नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा है कि कानून में बदलाव से पहले एक साथ चुनाव संभव नहीं है लेकिन लोकसभा के साथ 11 राज्यों के विधानसभा चुनाव की संभावना दिखती है लेकिन लिए सभी राजनीतिक दलों में सहमति जरूरी है। रावत ने कहा कि अगर विधानसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष सहमति से हाउस भंग करके चुनाव के लिए तभी राज्य में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं। रावत ने एक साथ सभी राज्यों में भी चुनाव कराने में असमर्थता जताई है।












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