BJP अध्यक्ष की रेस में आया अब इस चौंकाने वाले नेता का नाम, अमित शाह के हैं करीबी, जाति की वजह से टॉप कंटेंडर!
BJP President Race (Keshav Prasad Maurya): भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अब अंतिम चरण में है और पार्टी के भीतर चर्चाओं का तापमान तेजी से बढ़ गया है। बिहार में भाजपा की शानदार जीत और कई राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने के बाद अब पार्टी जनवरी 2026 तक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की तैयारी में है। जनवरी 2026 में भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है।
भाजपा के कई नेताओं का नाम भाजपा चीफ की रेस में आगे चल रहा है। लेकिन इस बार नामों की लंबी सूची में जो चेहरा सबसे चौंकाने वाला तरीके से आगे आया है, वह है-उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य की जातिगत पकड़, आरएसएस से पुराना जुड़ाव और अमित शाह से करीबियों की वजह से उन्हें इस रेस में जबरदस्त प्राथमिकता मिल रही है।

🔵अगले भाजपा अध्यक्ष की तैयारियां तेज!
भाजपा की संगठनात्मक प्रक्रिया 29 राज्यों में पूरी हो चुकी है। अब केवल उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में औपचारिकताएं बाकी हैं। जैसे ही 14 जनवरी को 'खरमास' खत्म होगा, माना जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया और तेज होगी। पार्टी का लक्ष्य जनवरी 2026 तक नया अध्यक्ष चुनने का है। जेपी नड्डा फिलहाल एक्सटेंशन पर हैं और इसी वजह से तय माना जा रहा है कि नया चेहरा जल्द सामने आएगा।
🔵 कई बड़े नाम, लेकिन सबसे आगे केशव प्रसाद मौर्य क्यों
पार्टी के भीतर जिन नेताओं पर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें केशव प्रसाद मौर्य,धर्मेंद्र प्रधान,भूपेंद्र यादव और शिवराज सिंह चौहान के नाम सामने आए हैं। लेकिन इनमें से मौर्य जिस तरह तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं, वह बेहद दिलचस्प है। माना जा रहा है कि RSS और अमित शाह के साथ उनका मजबूत सांठगांठ उन्हें अन्य दावेदारों से अलग खड़ा कर देता है।
🔵 RSS और अमित शाह से नजदीकी कर रही है मदद
केशव प्रसाद मौर्य का सफर भाजपा के कैडर पॉलिटिक्स की एक मिसाल माना जाता है। वे लंबे समय तक आरएसएस और विहिप के साथ जुड़े रहे। राम मंदिर आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि संगठन स्तर पर उन्हें 'कैडर का अपना आदमी' माना जाता है।
दिल्ली में अमित शाह से उनकी मुलाकातें अक्सर चर्चा में रहती हैं। हर बार दिल्ली से लौटने के बाद उनकी बॉडी लैंग्वेज और राजनीतिक सक्रियता नई ऊर्जा के साथ दिखाई देती है। यह संकेत कई बार पार्टी के अंदरूनी हलकों में साफ संदेश छोड़ जाते हैं।

🔵 OBC फैक्टर बना सबसे बड़ा प्लस पॉइंट
भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में OBC समीकरण पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। बिहार जीत में OBC नेताओं का प्रदर्शन और उनकी पकड़ मजबूत साबित हुई। ऐसे में पार्टी को ऐसे चेहरे की तलाश है जो देशभर के OBC वोट बैंक पर असर डाल सके।
मौर्य की इसी सामाजिक पृष्ठभूमि ने उन्हें शीर्ष रेस में सबसे आगे ला दिया है। पार्टी के कई रणनीतिकार मानते हैं कि मौर्य का OBC चेहरा भाजपा की 2026-27 की राजनीतिक रणनीति में काफी उपयोगी हो सकता है। केशव प्रसाद मौर्य का OBC जाति से होना ही उनको इस रेस में आगे रख रहा है।
🔵 अपनी सीट हारकर भी डिप्टी सीएम बने... ये कोई छोटी बात नहीं
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य सिराथू सीट से लगभग 7,000 वोटों से हार गए थे। आमतौर पर भाजपा जैसे सख्त अनुशासन वाली पार्टी में सीट हारने के बाद नेता के कद में कमी आती है। लेकिन मौर्य के मामले में ऐसा नहीं हुआ। हार के बावजूद उन्हें डिप्टी सीएम बनाए रखा गया। इस फैसले को पार्टी हाईकमान का सीधा संकेत माना गया।
जबकि उसी समय दूसरे डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को हटाकर ब्रजेश पाठक को लाया गया पर मौर्य का पद अडिग रहा। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि शीर्ष नेतृत्व उन्हें किसी बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रहा है।

🔵 CM योगी और केशव प्रसाद मौर्य में तनाव... फिर भी मिला बड़ा भरोसा
यूपी की राजनीति में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच टकराव की चर्चा नई नहीं है। कई बार दोनों नेताओं के अलग-अलग बयान और संदेश सुर्खियों में रहे। इसके बावजूद मौर्य को लगातार मजबूत पद पर बनाए रखना यह बताता है कि भाजपा मौर्य को सिर्फ प्रदेश नेता के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के विकल्प के रूप में देख रही है।
🔵 बिहार जीत में भी दिखा मौर्य का असर
हालिया बिहार चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता मिली। माना जा रहा है कि रणनीति बनाने में जहां अमित शाह का दिमाग लगा, वहीं इसे जमीनी स्तर पर लागू कराने में धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ी भूमिका निभाई।
लेकिन मौर्य की संगठन क्षमता और पिछड़े वर्ग तक पहुंच ने भी अभियान में ऊर्जा भरी। बिहार के कई क्षेत्रों में मौर्य की सभाओं को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसने पार्टी के भीतर उनकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता को और मजबूत किया है।
🔵 क्या BJP अब देगा सबसे बड़ा पद?
सारे संकेत बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष की रेस में केशव प्रसाद मौर्य का नाम अब केवल 'चर्चा' नहीं, बल्कि 'गंभीर संभावना' बन चुका है। उनकी जातिगत पकड़, अमित शाह से करीबी, RSS का समर्थन, कैडर पॉलिटिक्स में जमीनी सफर और कई हार-जीत के बावजूद शीर्ष नेतृत्व का भरोसा ये सभी बातें उन्हें इस पोस्ट के लिए एक मजबूत दावेदार बना देती हैं।
अगर 2026 में केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं, तो यह पहली बार होगा जब OBC बैकग्राउंड का कोई नेता पार्टी के शीर्ष पद पर बैठेगा-जो भाजपा की नई सामाजिक रणनीति की दिशा भी बताएगा।
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