मुसलमान वोटरों को रिझाने के लिए अब सूफी-संतों के भरोसे बीजेपी, 2024 के लिए ये है प्लान
भाजपा ने अब मुसलमान वोटरों के बीच भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी है। पार्टी अब सूफ-संत सम्मेलनों का आयोजन करवाने जा रही है, ताकि मुसलमानों तक अपनी बात पहुंचा सके।

भारतीय जनता पार्टी पिछले कुछ समय से मुसलमानों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए भी काफी कोशिशें कर रही है। हाल में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी की टॉप लीडरशिप की ओर से भी कार्यकर्ताओं को सभी समुदायों के बीच पहुंचने का संदेश दिया जा चुका है। यह संदेश प्राप्त होते ही भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा सक्रिय है और अपनी ओर से मुसलमानों के बीच पार्टी की नीतियों, उसके फैसले, कल्याणकारी योजना के बारे में जानकारियां पहुंचाने की पहल शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में अब सूफी-संतों के साथ संवाद कांफ्रेंसों का आयोजन हो रहा है, ताकि उनके माध्यम से आम मुसलमानों तक पहुंचना पार्टी के लिए और आसान हो सके।

सूफी-संतों के साथ संवाद करेगी बीजेपी
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने देश के प्रभावशाली सूफी-संतों तक पहुंचने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। पार्टी का मकसद है कि इसके जरिए वह सरकार की ओर से मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए बनाई गई नीतियों और उनके लिए शुरू की गई योजनाएं समुदाय के आम लोगों तक पहुंचाए। भाजपा ने अपने अल्पसंख्यक मोर्चा के माध्यम से इस तरह की योजना तैयार की है। पार्टी चाहती है कि अल्पसंख्यक समुदायों तक उसकी पहुंच बढ़ें, विशेष रूप से मुसलमानों के बीच पार्टी की पहुंच बनाई जा सके, जिससे कि वह पार्टी को समझें और उसके साथ जुड़ सकें।

मार्च से 'सूफी-संत संवाद कांफ्रेंस' का आयोजन
नई योजना के तहत पार्टी के कार्यकर्ता विभिन्न राज्यों के सूफ-संतों से संपर्क करेंगे और उनसे बातचीत करेंगे, जिनमें राजस्थान और दिल्ली भी शामिल है। खास बात ये है कि राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इस आउटरीच प्रोग्राम को 'सूफी-संत संवाद कांफ्रेंस' कहा जा रहा है, जिसके तहत धार्मिक नेता सभी संप्रदायों के बीच प्यार और भाईचारे का पैगाम देंगे। यह कांफ्रेंस मार्च से ही पूरे देश में शुरू हो रहा है, जिसका आयोजन भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा कर रहा है।

सरकारी योजनाओं के बारे में बताने पर भी फोकस
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने बताया कि मोदी सरकार ने साबित किया है कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास ' बीजेपी के लिए सिर्फ नारा नहीं है, यह एक डायनामिक प्रोजेक्ट है। सिद्दीकी बोले, 'मुस्लिम समुदाय समेत अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को यह महसूस करना चाहिए। उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों के बारे में बताने की आवश्यकता है कि इसका मकसद उन्हीं की तरक्की है।' जनसंघ के नेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय की एक लाइन का उदाहरण रखकर सिद्दीक ने कहा, 'मुसलमान हमारे मांस के मांस और खून के खून हैं।'

पीएम मोदी से सूफी-संतों की मुलाकात की भी तैयारी
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष ने बताया कि 'सूफी-संत संवाद कांफ्रेंस' का लक्ष्य उनके साथ एक विस्तृत चर्चा करनी है कि कैसे शांतिपूर्ण तरीके से देश को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा, 'समय की मांग है कि सूफी-संतों को सबसे आगे लाया जाए।' उनके मुताबिक अजमेर शरीफ और हजरत निजामुद्दीन और अन्य स्थानों के दरगाहों से धार्मिक नेताओं के अलावा दिल्ली के एक क्रिश्चियन संत को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। उनके मुताबिक अल्पसंख्यक मोर्चा जल्द ही सूफी-संतों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक मुलाकात भी करवाएगा।

टॉप लीडरशिप से मिला है संदेश
पिछले महीने ही भाजपा कार्यकारिणी में प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि उन्हें सभी समुदायों के बीच पहुंचने की कोशिश करनी है। उसके बाद से ही बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने अपनी रणनीति तैयार की है और उसके तहत सूफी-संतों को साथ लेने की पहल कर रहा है। इससे पहले पार्टी ने देश में ऐसी 60 मुस्लिम बहुल लोकसभा सीटों को भी चिन्हित किया था, जिसपर पार्टी को फोकस करना है। पार्टी की सोच यही रही है कि अगर मुस्लिम समुदाय पार्टी को वोट नहीं देता, फिर भी उनतक पहुंचना और सरकार के कल्याणकारी योजना के बारे में उन्हें बताना आवश्यक है।
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इन वर्गों के मुसलमानों पर भाजपा का फोकस
भाजपा के टारगेट में पसमांदा मुसलमानों के अलावा तमाम सूफी-संत,समाज के निचले तबके के लोग, पढ़े-लिखे मुसलमान और छोटे कारोबारी शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी का फोकस उन मुसलमानों पर भी है, जिन्हें किसी ना किसी रूप में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला है या मिल रहा है। जानकार बताते हैं कि इस तरह की पहल के पीछ बीजेपी की यह भी सोच है कि अपने खिलाफ एकजुट होकर पड़ने वाले मुस्लिम वोटों की धारा को मोड़ा जा सके।












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