BJP की नई टीम में इन 4 नेताओं के आने वाले हैं 'अच्छे दिन', होने जा रहा है अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर!
BJP New National team Organisation Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी में संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की तस्वीर लगभग साफ होती दिख रही है। एक तरफ मोदी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज है, तो दूसरी तरफ नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में भाजपा की नई टीम को फाइनल रूप दिया जाना भी लगभग तय माना जा रहा है।
इस महा-बदलाव को अंतिम रूप देने के लिए 2 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महासचिव बीएल संतोष के बीच करीब तीन घंटे तक एक बेहद अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद ये कहा जा सकता है कि नितिन नबीन की इस युवा और अनुभवी टीम में कई कद्दावर नेताओं के 'अच्छे दिन' आने वाले हैं, जबकि पार्टी की सबसे ताकतवर इकाई यानी पार्लियामेंट्री बोर्ड का चेहरा भी पूरी तरह बदलने जा रहा है।

इतना ही नहीं पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और तैयारियों से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार सिर्फ पदों की अदला-बदली नहीं होगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पूरी रणनीति नए सिरे से तैयार की जा रही है।
इसी वजह से कई ऐसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनकी जिम्मेदारी बढ़ सकती है। वहीं कुछ नेताओं को संगठन में नई भूमिका मिलने की भी संभावना जताई जा रही है।
अमित शाह और नितिन नबीन की हाई लेवल बैठक में क्या हुआ?
2 जुलाई को अमित शाह, नितिन नबीन और बीएल संतोष की बैठक में पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम और संगठन में होने वाले बदलावों पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और केंद्रीय मीडिया टीम के नए चेहरों पर अंतिम दौर की बातचीत हुई।
माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही नई टीम का ऐलान कर सकती है। हालांकि नामों का ऐलान कब किया जाएगा, फिलहाल इसकी कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम कैसी होगी?
महज 45 साल की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान संभालने वाले नितिन नबीन पार्टी इतिहास के सबसे युवा चीफ हैं। यही वजह है कि उनकी नई टीम में इस बार 'मिलियनेयर जेनरेशन' यानी नए और युवा चेहरों को सबसे ज्यादा तवज्जो मिलने वाली है।
संगठन के इस नए ढांचे में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और केंद्रीय मीडिया टीम के पदों के लिए नामों की छंटनी लगभग पूरी हो चुकी है। इस पूरी लिस्ट को बनाते समय देश के अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रीय समीकरणों और सामाजिक व जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका सीधा फायदा मिल सके।

BJP पार्लियामेंट्री बोर्ड में इन 4 दिग्गजों की होने जा रही है एंट्री
बीजेपी का 11 सदस्यीय पार्लियामेंट्री बोर्ड पार्टी का सबसे बड़ा और आखिरी फैसला लेने वाला सुप्रीम ग्रुप माना जाता है। यही बोर्ड संगठन और चुनाव से जुड़े बड़े फैसले करता है। अब इस बोर्ड में भी बड़े बदलाव की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका भी बदली जा सकती है। पार्टी ऐसा ढांचा तैयार करना चाहती है, जिसमें अनुभवी नेताओं का अनुभव और नई रणनीति दोनों साथ चलें। इस रेस में चार नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
1. विनोड तावड़े
हाल ही में राज्यसभा पहुंचने वाले राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का नाम इस समय सबसे ऊपर है। महाराष्ट्र और दिल्ली के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम करने वाले तावड़े को उनकी बेहतरीन चुनावी रणनीति के लिए बोर्ड में जगह मिल सकती है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर संगठन में बड़ा फेरबदल होता है तो तावड़े को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
2. सुनील बंसल
भाजपा के चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचान बना चुके सुनील बंसल भी चर्चा के केंद्र में हैं। पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में संगठन मजबूत करने में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर काफी अहम माना जाता है। यही वजह है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
3. देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस पहले से केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य हैं। अब चर्चा है कि उन्हें पार्लियामेंट्री बोर्ड में भी जगह मिल सकती है, जिससे पश्चिम भारत का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।
4. शिवराज सिंह चौहान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ लंबी बातचीत के बाद मध्य भारत और हिंदी पट्टी के सबसे मजबूत चेहरे के तौर पर शिवराज सिंह चौहान का बोर्ड में आना लगभग तय माना जा रहा है।

RSS मॉडल पर बदलेगी जिम्मेदारियां?
संगठन को जमीनी स्तर पर और ज्यादा धारदार बनाने के लिए बीजेपी इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'क्षेत्रीय प्रचारक' वाले फॉर्मूले पर काम करने जा रही है। इस नए ब्लूप्रिंट के मुताबिक, पार्लियामेंट्री बोर्ड के बड़े और वरिष्ठ नेताओं को केवल दिल्ली में रखने के बजाय सीधे तौर पर अलग-अलग रीजन्स (क्षेत्रों) का एक्सक्लूसिव इन-चार्ज बनाया जा सकता है।
इसमें उत्तर से लेकर पश्चिम भारत के राज्यों की जिम्मेदारी राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे सबसे अनुभवी नेताओं को देने का प्रस्ताव है। वहीं पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी आदिवासी बेल्ट की कमान सर्वानंद सोनोवाल को और तेजी से बढ़ते दक्षिण भारत के मोर्चे पर पूरी कमान के. लक्ष्मण को सौंपने की तैयारी है।
चुनावी समीकरणों और संतुलन का रखा जाएगा पूरा ध्यान
बीजेपी इस बात को अच्छी तरह जानती है कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले राज्यों के चुनावों को जीतने के लिए सामाजिक संतुलन कितना जरूरी है। यही वजह है कि पार्लियामेंट्री बोर्ड के पुनर्गठन में कुछ मौजूदा चेहरे अपनी जगह बरकरार रखेंगे।
इनमें ओबीसी और महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर सुधा यादव, सिख और अल्पसंख्यक कोटे से इकबाल सिंह लालपुरा और अनुसूचित जाति (SC) के बड़े चेहरे के रूप में सत्यनारायण जटिया को बोर्ड में बनाए रखा जाएगा ताकि समाज के हर वर्ग तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचे।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का महा-प्लान तैयार
मिशन 2027 को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सूबे में बहुत बड़ा सांगठनिक ऑपरेशन चलाया है। यूपी में पार्टी ने अपने सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया है और 64 सदस्यों की एक बिल्कुल नई प्रदेश कार्यकारिणी खड़ी कर दी है। इस टीम में बीजेपी के कोर वोट बैंक यानी गैर-यादव ओबीसी (Non-Yadav OBC) समुदाय से 25 से ज्यादा पदाधिकारियों को जगह दी गई है।
इसके साथ ही अपने सामाजिक दायरे को बड़ा करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह और समाजवादी पार्टी से आईं पूर्व विधायक पूजा पाल को यूपी बीजेपी का नया उपाध्यक्ष बनाया गया है ताकि जमीनी पकड़ को और मजबूत किया जा सके।















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