मासूमों की मौत पर बीजेपी नेता का बेतुका बयान, कहा-भगवान ने बच्चों की इतनी ही उम्र लिखी थी

नई दिल्ली। उत्तरी दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि हॉस्पिटल में डिप्थीरिया की वजह से बच्चों की मौत थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले चौबीस घंटे में एक और मौत का मामला सामने आया है। महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में 6 सितंबर से 19 सितंबर के बीच डिप्थीरिया (गलाघोंटू) से पीड़ित 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रहीं इन मौतों पर बीजेपी की एक महिला नेता ने बेतुका बयान दिया है। भाजपा पार्षद ने कहा निगम की बैठक में कहा कि, 'शायद इन बच्चों की भगवान ने इतनी ही उम्र लिखी थी?'

शायद इन बच्चों की भगवान ने इतनी ही उम्र लिखी थी

शायद इन बच्चों की भगवान ने इतनी ही उम्र लिखी थी

डिप्थीरिया से बच्चों की मौत का मामला नॉर्थ एमसीडी सदन में बुधवार को गूंजा। चर्चा शुरू होते ही बीजेपी पार्षद सदन छोड़कर निकल गए। कुछ देर बाद जब दोबारा सदन शुरू हुआ, तो स्टैंडिंग कमिटी की चेयरमैन वीणा वीरमानी ने कहा कि, 'शायद इन बच्चों की भगवान ने इतनी ही उम्र लिखी थी? जिसके बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सदन में हंगामा करना शुरू कर दिया। मेयर भी मामले को यह कहकर टालते रहे कि दोषी मेडिकल सुपरिटेंडेंट के खिलाफ एक्शन लिया गया है।

 हॉस्पिटल भी एमसीडी क्यों चला रहा है

हॉस्पिटल भी एमसीडी क्यों चला रहा है

कांग्रेस पार्षद मुकेश गोयल का कहना है कि बच्चों की मौत की जिम्मेदारी लेने और दवाइयों का प्रबंध करने के बजाय बीजेपी नेता इस मुद्दे को भटकाना चाह रहे हैं। अगर अस्पताल में सबकुछ भगवान भरोसे ही है तो इलाज के लिए दवाइयां क्यों मंगाई गईं। आम आदमी पार्टी के पार्षद विकास गोयल ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर अस्पताल में सबकुछ भगवान भरोसे ही है, तो इलाज के लिए दवाइयां क्यों मंगाई गईं। बच्चों की हालत भगवान भरोसे ही छोड़ देनी चाहिए। जब जबकुछ भगवान भरोसे ही होता है, तो हॉस्पिटल भी एमसीडी क्यों चला रहा है।

सितंबर में 25 बच्चों की मौत

सितंबर में 25 बच्चों की मौत

पिछले कई दिनों से एमसीडी के इस अस्पताल में डिप्थीरिया की वजह से बच्चों की मौत हो रही है। पहले कहा जा रहा था कि अस्पताल में इस बैक्टीरिया के खिलाफ जरूरी इलाज का एंटी डोज नहीं है। औसतन हर दूसरे दिन किसी न किसी बच्चे की मौत हो रही है। मौत की वजह जानने के लिए डब्ल्यूएचओ की टीम भी कई बार विजिट कर चुकी है। लेकिन अभी तक इसका इलाज पर कोई असर नहीं दिख रहा है। बता दें कि, डिप्थीरिया के बैक्टीरिया से केवल सितंबर में 25 बच्चों की मौत हो चुकी है।

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