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Hijab Controvercy: 'भाजपा सरकार है, बजरंगदल की नहीं', BJP के वरिष्ठ नेता ने अपनी ही सरकार को दे डाली ये नसीहत?

नई दिल्ली, 29 मार्च। हिजाब विवाद (Hijab controversy) को लेकर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। कर्नाटक हाईकोर्ट के बाद यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दरअसल, मुस्लिम व्यापारियों के विरोध में दक्षिणपंथी संगठनों के आह्वान की निंदा की है। जिसमें मुस्लिम व्यापारियों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। वहीं कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य एच विश्वनाथ (Adagur H Vishwanath) ने मामले में भाजपा सरकार पर मूकदर्शक बनने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह प्रदेश सरकार (Karnataka Government) धार्मिक राजनीति में लिप्त है।

Adagur H Vishwanath

कर्नाटक के उडुपी के स्कूल में छात्राओं के हिजाब पहनकर स्कूल आने की जिद ने विवाद की शक्ल ले ली। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर सुनवाई की। जिसके बाद अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि हिजाब इस्लाम धर्म का अहम हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने पर पाबंदी को हटाने से इनकार कर दिया। मामला यहीं नहीं थामा कर्नाटक उच्चतम न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जहां हिजाब पहने पर स्कूलों को में लगी पाबंदी फिर से हटाने की मांग की गई। वहीं अब भाजपा के वरिष्ठ नेता व विधान परिषद सदस्य एच विश्वनाथ अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल खड़े कर रहें हैं.

हिजाब विवाद (Hijab controversy) वाब में हिंदू संगठन मुखर हो रहे हैं। कर्नाटक में दक्षिणपंथी संगठनों ने मुस्लिम व्यापारियों को मंदिर परिसर से प्रतिबंधित करने का आह्वान किया है। भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता व कर्नाटक विधान परिषद सदस्य एच विश्वनाथ (Adagur H Vishwanath) ने इस आह्वान की निंदा की और कर्नाटक सरकार पर धार्मिक राजनीति में लिप्त रहने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में भी मुसलमान रहते हैं। ये मुसलमान खाना और फूल बेचते हैं। इससे क्या फर्क पड़ता है? एच विश्वनाथ ने कहा कि वे छोटे व्यवसायी हैं। अगर उनका विरोध किया गया तो वे क्या खाएंगे? उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम कोई फर्क नहीं पड़ता। यह पेट का सवाल है। उन्होंने कहा कि दो समुदायों के बीच हुए संघर्ष को कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) मूकदर्शक के रूप में देख रही है।

आपको बता दें कि पिछले दिनों कर्नाटक में दक्षिणपंथी संगठनों ने गैर-हिंदू व्यापारियों के लिए मंदिर परिसर में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। संगठनों ने हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय के विरुद्ध उडुपी में एक वर्ग द्वारा बंद का हवाला दिया गया था। जिसके बाद उडुपी के कौप में मारी गुड़ी मंदिर के अधिकारियों ने 22 और 23 मार्च को सुग्गी मारी पूजा उत्सव के दौरान मुसलमानों को व्यवसाय के लिए अस्थाई तौर आवंटित की जाने वाली जगह के लिए अनुमति नहीं दी। मामले में कर्नाटक विधान परिषद सदस्य एच विश्वनाथ ने इस आह्वान की निंदा है। वे पहले भी मुख्यमंत्री बोम्मई पर मामले को निशान साध चुके हैं। उन्होंने कहा था यह भाजपा की सरकार है, बजरंग दल,आरएसएस या कुछ गुटों की नहीं। सरकार को मूकदर्शक बनने के बजाय मामले में एक एक स्टैंड लेना चाहिए।

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