यूपी में बीजेपी की नई लिस्ट: किसी को गिफ्ट तो कोई शिफ्ट

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी ने 2019 लोक सभा चुनाव के लिए 26 मार्च को 39 प्रत्याशियों की एक और लिस्ट जारी कर दी। इनमें 29 उत्तर प्रदेश के हैं। उत्तर प्रदेश में मुरली मनोहर जोशी, भरत सिंह सहित पांच और सांसदों के टिकट काटे गए हैं जबकि चार की सीट बदली गई हैं। इलाहाबाद से श्यामाचरण और बहराइच से सावित्रीबाई फुले पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं । इस तरह बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से पूर्वांचल की कुछ सीटों को छोड़ उत्तर प्रदेश की ज्यादातर सीटों पर अब तक प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इनमें राजेश पाण्डेय का कुशीनगर से, नेपाल सिंह का रामपुर से, अशोक दोहरे का इटावा से भरतसिंह का बलिया से, मुरलीमनोहर जोशी का कानपुर से टिकट कटा है। पार्टी ने भदोही से सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को इस बार बलिया लोकसभा से उतारने का फैसला किया है। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया को आगरा की बजाय इटावा से टिकट दिया है। मेनका गाँधी और वरुण की सीट को आपस में बदला गया है।

बीजेपी की लिस्ट में दिखे कई बदलाव

बीजेपी की लिस्ट में दिखे कई बदलाव

मिर्ज़ापुर की सीट पर सहयोगी दल की अनुप्रिया पटेल को मिलाकर उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में अब तक बीजेपी के दो तिहाई से ज्यादा योद्धा आ गये हैं। वैसे तो किसी भी दल के लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण होती है लेकिन कुछ चुनाव क्षेत्र और प्रत्याशियों के साथ पार्टी की प्रतिष्ठा जुडी होती है। साथ ही इन पर हार-जीत के साथ राजनीति की दिशा भी तय होती। दरअसल किसी बड़े नेता या स्टार के मैदान में उतरने से उस सीट का महत्व बढ़ जाता है। इस लिहाज से मंगलवार को जारी लिस्ट में रामपुर, पीलीभीत, सुल्तानपुर, प्रयागराज (इलाहाबाद), कानपुर और इटावा विशेष रूप से चर्चित रहेंगी ।

जयाप्रदा को बीजेपी का रिटर्न गिफ्ट

जयाप्रदा को बीजेपी का रिटर्न गिफ्ट

इसमें सबसे चर्चित रामपुर लोकसभा सीट है। यहाँ समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान मैदान में है तो उनका मुकाबला करेंगी बीजेपी के लिए नई नवेली सदस्य जयाप्रदा। किसी ज़माने की फिल्म स्टार वैसे तो राजनीति में नई नहीं है। रामपुर से ही वह पहले भी दो बार सांसद रह चुकी हैं । लेकिन भाजपा के टिकट पर वह पहली बार चुनाव लड़ेंगी । 26 मार्च को दोपहर को जयाप्रदा बीजेपी में शामिल हुईं और शाम को जारी प्रत्याशियों की नई सूची में उनको रामपुर से आजम खान के खिलाफ मोर्चे पर उतार दिया गया। इसे एक तरह से जयाप्रदा को बीजेपी का रिटर्न गिफ्ट माना जा रहा है। जयाप्रदा के राजनीतिक कैरियर में अमर सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनको राजनीति में लाने का श्रेय अमर सिंह को ही जाता है। किसी जमाने में सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के अत्यंत ख़ास रहे अमर सिंह की बदौलत ही जयाप्रदा को रामपुर से दो बार लोकसभा का टिकट मिला और जीत हासिल हुई । लेकिन राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में पहले आजम खान फिर अखिलेश यादव से उनकी दूरियां बढ़ती गईं और अमर सिंह को सपा से जाना पड़ा । अमर सिंह के साथ जयाप्रदा की भी रुखसती समाजवादी पार्टी से हो गई । लेकिन राजनीतिक दांव-पेंच के माहिर खिलाडी अमर सिंह का प्रेम बीजेपी के साथ धीरे धीरे बढ़ने लगा । अटकलें तो यह भी थीं कि अमर सिंह बीजेपी में आ सकते हैं । अमर सिंह तो शामिल नहीं हुए लेकिन उनको भी बीजेपी की नीति और रीती के प्रति आस्था दर्शाने के बदले उपहार जयाप्रदा के टिकट के रूप में मिला। फिलहाल उत्तर प्रदेश में टिकट को लेकर पार्टी कार्यकर्त्ता संतुष्ट दिख रहे हैं ।

रामपुर में जया प्रदा का आजम से मुकाबला

रामपुर में जया प्रदा का आजम से मुकाबला

रामपुर लोकसभा क्षेत्र में करीब 16 लाख से अधिक मतदाता हैं, इनमें 872084 पुरुष और 744900 महिला वोटर हैं। 2014 में यहां कुल 59.2 फीसदी वोट पड़े थे, इनमें से भी 6905 नोटा को गए थे। 2011 की जनगणना के अनुसार रामपुर क्षेत्र में कुल 50.57 % मुस्लिम आबादी है, जबकि 45.97 % हिंदू जनसंख्या है। यहाँ अबतक हुए लोक सभा के 16 चुनावों में दस बार कांग्रेस को जीत मिली। 2019 के पहले यहं से कांग्रेस ने हमेशा मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा। इस चुनाव में पहली बार कांग्रेस ने पली बार गैरमुस्लिम प्रत्याशी संजय कपूर को टिकट दिया है। आजम खान के लिए भी पहला मौका जय जब वह रामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। आजम खान अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर हैं तो अमर सिंह तल्ख़ टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। जयाप्रदा के आने से रामपुर में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस और सपा दोनों की नज़र मुस्लिम वोटों पर है और बीजेपी को लगता है कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा और अमर सिंह का चुनाव मैनेजमेंट तीसरी बार भी जयाप्रदा की नैय्या पार लगाएगा।

मेनका गांधी-वरुण की सीटों में भी किया गया बदलाव

मेनका गांधी-वरुण की सीटों में भी किया गया बदलाव

इस बार मेनका गांधी सुल्‍तानपुर और वरुण गांधी पीलीभीत से चुनाव मैदान में उतरेंगे। बीजेपी आला कमान ने बड़ी चतुराई से अपनी दो गोटियों की अदला-बदली कर सन्देश देने का प्रयास किया है कि गाँधी परिवार से आये ये दोनों सदस्य संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं और बीजेपी ऐसे निष्ठावान सदस्यों का सम्मान करती है । बीच में खबर आई थी कि वरुण की संघ के पदाधिकारियों से नहीं पट रही और वह कांग्रेस में जा सकते हैं । वरुण ने इसका पुरजोर खंडन किया था। पीलीभीत से टिकट पर वरुण गांधी ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह का शुक्रगुजार हूं, जिन्‍होंने एक बार फिर मुझ पर विश्‍वास जताया। मुझे पीलीभीत लौट कर गर्व महसूस कर रहा हूं। इस सीट से मेरा पारिवारिक संबंध रहा है। पीलीभीत के किसानो खासकर गन्ना किसानो की समस्या को ठीक से न सुलझा पाने और गन्ना न उगाने की सलाह के कारण मेनका गाँधी की काफी किरकिरी हुई थी। मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए मेनका की सीट बदली गई, ऐसा माना जा रहा है। इस बार भाजपा के दिग्‍गज नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकट काट दिया गया है। कानपुर से जोशी की जगह अब सत्‍यदेव पचौरी चुनाव मैदान में होंगे। इसके पीछे कारण मुरली मनोहर जोशी की बढती उम्र को बताया जा रहा।

राम शंकर कठेरिया को इटावा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। इस सीट पर सपा की ओर से कमलेश कठेरिया मैदान में हैं। जातीय समीकरण को ध्यान में रह उन्हें इटावा भेजा गया है । रीता बहुगुणा जोशी को इलाहाबाद सीट से भाजपा ने चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। दरअसल इलाहबाद से रीता बहुगुणा जोशी का गहरा रिश्ता है । डॉ. रीता बहुगुणा जोशी की शिक्षा दीक्षा इलाहाबाद में ही हुई । इलाहबाद उनकी कर्मभूमि रहा है । वह इलाहाबाद की मेयर भी रह चुकीं हैं । डॉ. रीता जोशी अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने 1971 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में इलाहाबाद संसदीय सीट से जीत हासिल की थी। उनकी मां कमला बहुगुणा ने 1977 के चुनाव में फूलपुर सीट से जीत हासिल की थी।

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