परेशान किसानों की नजरें बीजेपी पर

framers survey
नई दिल्‍ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री ने 'जय जवान, जय किसान,' का नारा दिया था लेकिन आने वाले लोकसभा चुनावों के बाद हो सकता है बीजेपी सिर्फ 'जय किसान' करती नजर आए।

सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) की ओर से हुआ एक सर्वे के मुताबिक अप्रैल-मई में होने वाले चुनावों में किसानों के वोट्स बीजेपी के खाते में जाते नजर आ रहे हैं। इस सर्वे में बीजेपी किसानों की पसंदीदा पार्टी बनकर उभरी है।

ज्‍यादातर किसानों ने कहा है कि वह चुनावों में बीजेपी के लिए वोट डालने से पीछे नहीं हटेंगे। इस सर्वे में एक और जो खास बात सामने आई है कि जिस मनरेगा के बारे में कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी अपनी हर रैली में बताते नहीं थकते हैं, उसके बारे में ज्‍यादातर किसानों को मनरेगा योजना से किसी भी तरह का रोजगार नहीं मिला है।

सीएसडीएस के वरिष्‍ठ अधिकारी संजय कुमार ने इस सर्वे के बारे में बताया कि इस सर्वे को देश के18 राज्‍यों के 137 जिलों में रहने वाले 5,000 से ज्‍यादा किसानों पर कंडक्‍ट कराया गया था। सर्वे के दौरान हर घर की एक महिला और एक व्‍यस्‍क सदस्‍य को भी खासतौर पर इसमें शामिल किया गया था।

सर्वे को संस्‍था की ओर से भारत कृषक समाज के लिए दिसंबर 2013 से जनवरी 2014 के मध्‍य कराया गया था। सर्वे में यह बात साफ है कि बीजेपी किसानों की पसंदीदा पार्टी के तौर पर सामने आ रही है।

बीजेपी उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड, हरियाणा, पंजाब, दिल्‍ली, चंडीगढ़, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश, बिहार और मध्‍य प्रदेश में पसंदीदा पार्टी बनी है तो वहीं महाराष्‍ट्र और गुजरात के मध्‍य पश्चिम क्षेत्र में इसकी लोकप्रियता में इजाफा होता जा रहा है।

हालांकि दक्षिण कुछ राज्‍यों में किसानों के समूह में बीजेपी और कांग्रेस से अलग क्षेत्रीय पार्टियों ने जगह बना रखी है। इस सर्वे से देश के किसानों की खराब हालत की एक तस्‍वीर भी सामने आई है।

किसानों की मानें तो भ्रष्‍टाचार नहीं बल्कि बढ़ते दाम उनके लिए चिंता का विषय हैं


इस सर्वे में सामने आई कुछ खास बातें इस तरह से हैं-

-सर्वे की मानें तो 76 प्रतिशत किसान अपने काम से खुश नहीं है और उन्‍होंने किसी और काम को करने की इच्‍छा जताई।
-60 प्रतिशत किसान नहीं चाहते कि उनके बच्‍चे गांव में रहें।
करीब 85 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिन्‍होंने मनरेगा के बारे में सुना तो है लेकिन 51 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिन्‍हें इस योजना के तहत रोजगार ही नहीं मिला है।
-70 प्रतिशत किसानों ने डायरेक्‍ट कैश ट्रांसफर स्‍कीम के बारे में सुना ही नहीं है।
-58 प्रतिशत किसानों ने कहा कि राज्‍य और केंद्र दोनों ही सरकारें उनकी समस्‍या के लिए जिम्‍मेदार हैं।
-करीब 62 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिन्‍हें मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी एमएसपी की कोई जानकारी नहीं है।
-ऐसे किसान जिन्‍होंने कभी एमएसपी के बारे में सुना उनमें से 64 प्रतिशत किसानों ने कहा कि वह सरकार की ओर से तय की फसलों की कीमत से खुश नहीं हैं।
-सिर्फ 27 प्रतिशत किसानों को ही भू-अधिग्रहण योजना की जानकारी है।
-83 प्रतिशत किसानों ने कभी एफडीआई के बारे में नहीं सुना है।
-जिन किसानों को इसके बारे में पता है उनमें से 51 प्रतिशत ने कृषि क्षेत्र में एफडीआई को नामंजूर करने की बात कही।

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