दिल्ली में हर्षवर्धन बनें सीएम, केजरीवाल 'इनसाइड लोकपाल'

सबसे पहले हम बात करेंगे- आम आदमी पार्टी के उस बात की जिस पर वो आज भी अटल है- "हम न तो भ्रष्टाचार करेंगे और न ही भ्रष्टाचार होने देंगे। न हम किसी पार्टी को समर्थन देंगे और न ही किसी का समर्थन लेंगे।" इन दोनों ही बातों पर आम आदमी पार्टी खरी उतर सकती है, अगर वो भारतीय जनता पार्टी को बाहर से समर्थन दे दे और डा. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री चुन लिया जाये। ऐसी स्थिति में अरविंद केजरीवाल व उनके साथ सरकार में कोई भी मंत्रालय लेने के बजाये, 'इनसाइड लोकपाल' का काम करें, यानी इनसाइड वॉचडॉग। बन जाये। ऐसे में सरकार के अंदर रहकर आम आदमी पार्टी भाजपा के क्रियाकलापों पर पैनी नजर रख सकेगी और नजर रखना आसान भी होगा।
सरकार पर पैनी नजर रखने का जो काम केजरीवाल नेता विपक्ष बनकर करने की सोच रहे हैं, वह वो सरकार के अंदर रहकर ज्यादा बेहतर ढंग से कर पायेंगे। अंदर रहकर वो हर कदम पर यह देख सकते हैं, कि कौन से मंत्रालय में क्या चल रहा है और कहीं किसी भी कदम पर भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा है। यही नहीं बिजली, पानी का जो वादा जनता से किया है, उस वादे को भी पूरा कर सकती है, अपनी स्ट्रैटेजी भाजपा के साथ साझा करके। क्योंकि विपक्ष में बैठकर सरकार को कोसने से बेहतर है अंदर बैठकर अच्छे सुझाव देना व सकारात्मक सुझाव देना। साथ ही जो काम लोकपाल बाहर बैठकर करेगा, वह केजरीवाल अंदर बैठकर कर सकेंगे।
भाजपा की सरकार भी बन जाये, आप की नाक भी बच जाये
आपको व आम आदमी पार्टी के समर्थकों को मेरी यह बात मजाक लगेगी, लेकिन मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि अगर दिल्ली परिवर्तन की ओर बढ़ चुकी है, तो यह परिवर्तन क्यों नहीं? ऐसा होने पर दिल्ली में लोकपाल बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।
वैसे यह बात सिर्फ मैं नहीं कह रहा हूं, पूर्व आईपीएस किरण बेदी भी यही कह चुकी हैं, कि दोनों मिलकर सरकार बनायें और दोनों के बेस्ट नेताओं को मंत्री चुनकर बेस्ट गवर्नेन्स प्रदान करें। खैर हम आपको यहां बताना चाहेंगे कि नियमानुसार दिल्ली के उपराज्यपाल भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे, जिसमें दिल्ली को अपना बहुमत सिद्ध करना होगा। रही बात संख्या की, तो कई बार जब विधायक ऐन मौके पर ऐब्स्टेन कर जाते हैं, तब संख्या कम होने पर भी सरकार बनाने का न्योता दिया जाता है।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने कहा है कि वो उपराज्यपाल का निमंत्रण मिलने पर बहुमत साबित करने के प्रयास करेंगे, लेकिन अगर बहुमत सिद्ध नहीं हुआ, तो विपक्ष में बैठने को तैयार हैं। चहीं आम आदमी पार्टी के सभी नेता भाजपा और कांग्रेस से अभी भी बराबर दूरी बनाये हुए हैं।












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